-संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
बिहार लोक भवन में म्यांमार और बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक हालात पर विशेष व्याख्यान का आयोजन
पटना, 19 सितंबर: बिहार लोक भवन में ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला के तहत भारत के पूर्वी मोर्चे से जुड़े रणनीतिक महत्व के विषयों पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र में म्यांमार और बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक हालात, सुरक्षा चुनौतियों तथा भारत के कूटनीतिक विकल्पों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में दो वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने अपने विचार रखे। लेफ्टिनेंट जनरल पी. सी. नायर ने म्यांमार और मेजर जनरल जे. एस. नंदा ने बांग्लादेश की सामरिक स्थिति पर विश्लेषण प्रस्तुत किया।
लेफ्टिनेंट जनरल पी. सी. नायर ने कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’, पूर्वोत्तर राज्यों और आसियान देशों से संपर्क के लिए म्यांमार का विशेष महत्व है। उन्होंने भारत-म्यांमार सीमा, उग्रवाद, सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन, मादक पदार्थों की तस्करी और दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों को रेखांकित किया। उन्होंने म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि भारतीय हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा के साथ-साथ व्यापारिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी सुदृढ़ करना आवश्यक है।
मेजर जनरल जे. एस. नंदा ने शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में उभरे नए हालातों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ता कट्टरपंथ और वहां के रक्षा तंत्र में इसका असर भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसके समाधान हेतु उन्होंने बांग्लादेश के युवाओं से मजबूत संवाद स्थापित करने और कूटनीति में सामयिक बदलाव लाने पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को बांग्लादेश के साथ एक जिम्मेदार और सहयोगी बड़े भाई की भूमिका में आगे बढ़ना चाहिए तथा जनमत निर्माण में भी सक्रिय रहना होगा।

सत्र की शुरुआत में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बिहार लोक भवन बौद्धिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बन रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्वी मोर्चे को केवल तात्कालिक घटनाओं के संदर्भ में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। इससे पहले राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रो. चिंतामणि महापात्र ने किया। व्याख्यान के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें शोधार्थी, विद्यार्थी और प्रबुद्धजन शामिल रहे।
