बीएसएल में ‘जीरो टॉलरेंस रूल्स’ अभियान शुरू

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Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों के सख्त पालन पर जोर, नियमों की अनदेखी करने वालों पर होगी तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई

बोकारो, 14 जुलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने अपने सभी संयंत्रों एवं इकाइयों में कार्यस्थल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ‘जीरो टॉलरेंस रूल्स’ अभियान लागू कर दिया है। इसी क्रम में बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) में भी व्यापक स्तर पर विशेष सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक दुर्घटनाओं को शून्य स्तर पर लाना तथा कर्मचारियों और ठेका कर्मियों के बीच सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

बीएसएल प्रबंधन के अनुसार, अभियान के तहत सुरक्षा संबंधी सभी मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यस्थल पर व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) जैसे सुरक्षा हेलमेट, सुरक्षा जूते, विशेष दस्ताने और सुरक्षा चश्मे के अनिवार्य उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही मशीनों की मरम्मत एवं रखरखाव के दौरान आइसोलेशन, लॉक और वेरिफिकेशन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन कराया जाएगा तथा भारी मशीनरी के आसपास सुरक्षा गार्डिंग सुनिश्चित की जाएगी।

संयंत्र के गैस-संभावित क्षेत्रों में कार्य प्रारंभ करने से पहले और कार्य के दौरान लगातार गैस मॉनिटरिंग अनिवार्य कर दी गई है। वहीं ऊंचाई पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए वैध हाइट पास एवं निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होगा। संकुचित स्थानों (कन्फाइंड स्पेस) में केवल अधिकृत परमिट और स्टैंडबाय कर्मी की उपस्थिति में ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

अभियान के तहत संयंत्र परिसर में सड़क सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वाहनों के लिए निर्धारित गति सीमा का पालन अनिवार्य किया गया है। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा सीट बेल्ट पहनना तथा दोपहिया वाहन चालकों के लिए चिन स्ट्रैप युक्त क्रैश हेलमेट का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

बीएसएल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि ‘जीरो टॉलरेंस रूल्स’ के उल्लंघन को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारी, कर्मचारी अथवा ठेका कर्मियों के विरुद्ध निर्धारित अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत तत्काल विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रबंधन का मानना है कि यह अभियान केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे प्रत्येक कर्मचारी सुरक्षित वातावरण में कार्य कर सके और औद्योगिक दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो।