– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल, घायल छात्रों के इलाज का दावा; मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
रांची, 11 अगस्त : झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने मंगलवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। छात्र नेताओं ने दावा किया कि 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के लिए जुटे हजारों छात्र शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें रखने के लिए पहुंचे थे, लेकिन शाम के समय पुलिस ने अचानक प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
विभिन्न जिलों से रांची पहुंचे छात्र
मंच के नेताओं के अनुसार, ट्रेनों और रास्तों में छात्रों को कथित तौर पर रोके जाने के बावजूद राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे। आंदोलन को व्यवस्थित रखने के लिए करीब 300 से 500 वॉलंटियर्स की तैनाती की गई थी।
छात्र नेताओं ने कहा कि सुबह करीब 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक पुलिस-प्रशासन की ओर से सहयोग मिला। उन्होंने इसके लिए प्रशासन का आभार भी जताया। उनका दावा है कि शाम तक सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर कोई स्पष्ट संदेश नहीं मिलने पर छात्र सड़क पर शांतिपूर्वक बैठकर सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे थे।
अचानक लाठीचार्ज का आरोप
छात्र नेताओं का आरोप है कि इसी दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए हैं और कुछ घायल छात्रों का इलाज सदर अस्पताल में कराया जा रहा है।
मंच ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं को हटाने के दौरान पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं और पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा छात्राओं पर लाठियां चलाई गईं। छात्र नेताओं ने इसे पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल बताया।
पत्रकारों पर भी कार्रवाई का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र नेताओं ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कवरेज कर रहे कुछ पत्रकारों को भी कथित तौर पर लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। मंच ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
छात्र नेताओं ने पीयूष नामक छात्र नेता के साथ मारपीट का आरोप भी लगाया। इसके अलावा एक अन्य छात्र नेता को कुछ समय के लिए हिरासत में लिए जाने की बात कही गई।
सरकार के संवाद के दावे पर सवाल
छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संवाद और बातचीत के दावों पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि सरकार एक ओर लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की बात करती है, जबकि दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मंच ने कहा कि विधानसभा घेराव का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों की मांगों को सरकार तक पहुंचाना था। छात्र नेताओं ने सरकार से मांगों पर तत्काल पहल करने की अपील की।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्र नेताओं ने कहा कि आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर जल्द ही एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।
मंच ने चेतावनी दी कि यदि सरकार के रुख में बदलाव नहीं आया और छात्रों की मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हालांकि, आंदोलन के अगले चरण और प्रस्तावित कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में देने की बात कही गई है।
नोट: लाठीचार्ज, घायल छात्रों, महिला पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर कार्रवाई से संबंधित आरोप छात्र नेताओं द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

