कवि सत्यनारायण को साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि

Live ख़बर

संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट

बिहार गीत और नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलगीत के रचयिता के निधन पर आरा में हुई प्रार्थना सभा

आरा | 29 अगस्त 2026 : बिहार के चर्चित साहित्यकार एवं सांस्कृतिक व्यक्तित्व कवि सत्यनारायण के निधन पर अखिल भारतीय हिंदी साहित्य समागम कार्यालय, शिवलोक भवन, पावरगंज, आरा में प्रार्थना सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कवि सत्यनारायण का 92 वर्ष की आयु में 27 अगस्त को पटना के कदमकुआं स्थित आवास पर निधन हुआ था।

कवि सत्यनारायण बिहार गीत ‘मेरे भारत के कंठहार’ तथा नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलगीत ‘ज्ञान तीर्थ यह महापुनित’ के रचयिता थे। वे हिंदी प्रगति समिति, मंत्रिमंडल सचिवालय, राजभाषा विभाग, बिहार सरकार के अध्यक्ष भी रहे। साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका था।

प्रार्थना सभा की अध्यक्षता डॉ. उमेश राय ने की, जबकि संचालन प्रो. राजेंद्र शर्मा पुष्कर ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थित सदस्यों द्वारा दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत साहित्यकार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना से हुई। इसके बाद वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और साहित्यिक कृतित्व को याद किया।

एसबी कॉलेज में आयोजित सम्मेलन की स्मृतियां साझा कीं

प्रो. राजेंद्र शर्मा पुष्कर ने कवि सत्यनारायण के साथ जुड़े संस्मरण साझा करते हुए 21 जुलाई 2019 को आरा के एसबी कॉलेज सभागार में आयोजित अखिल भारतीय हिंदी साहित्य समागम सम्मेलन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस सम्मेलन में कवि सत्यनारायण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए थे। इसी अवसर पर ‘हिंदी-प्रवाह’ पत्रिका का लोकार्पण भी उनके हाथों हुआ था।

डॉ. उमेश राय ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलगीत ‘ज्ञान तीर्थ यह महापुनित’ का गायन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। युवा कवि आदित्य प्रकाश ने बिहार गीत ‘मेरे भारत के कंठहार’ प्रस्तुत किया। गीतों के माध्यम से उपस्थित लोगों ने उनके साहित्यिक योगदान और स्मृतियों को भावपूर्ण ढंग से याद किया।

प्रार्थना सभा में सुनील विश्वकर्मा, रामचंद्र प्रसाद, ललन सिंह, शिवकुमार पाल, अशोक कुमार शर्मा, डॉ. राजेंद्र सिंह त्यागी, शैलेंद्र कुमार सिंह, चंद्रभानु गुप्ता, जागवलि सिंह, अखिलेश पुष्कर, रंजन कुमार, कृष्ण प्रसाद, सृष्टि कुमारी और ऋषभ पुष्कर सहित कई साहित्यप्रेमी एवं सदस्य उपस्थित रहे।