– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher
सड़क-रेल संपर्क, ज्ञान एवं नवाचार नगर और उच्च शिक्षा तंत्र से सहयोग मजबूत करने पर मंथन
पटना, 10 अगस्त 2026। बिहार लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में नालंदा विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के सड़क एवं रेल संपर्क को बेहतर बनाने, नालंदा विश्वविद्यालय-राजगीर ज्ञान एवं नवाचार नगर के समग्र विकास तथा बिहार सरकार और राज्य के उच्च शिक्षा तंत्र के साथ विश्वविद्यालय के सहयोग को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. अरविंद पनगढ़िया, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, शिक्षकगण तथा बिहार लोक भवन के अधिकारी उपस्थित रहे।
बिहार की प्रतिभा को वैश्विक मंच पर लाने पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि बिहार में प्रतिभा और बौद्धिक क्षमता की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि बिहार की प्रतिभा और बौद्धिक सामर्थ्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से सामने लाया जाए।
उन्होंने नालंदा की समृद्ध बौद्धिक एवं सभ्यतागत विरासत को लेखन और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि नालंदा के इतिहास, ज्ञान परंपरा और विरासत से संबंधित लेख एवं ज्ञानपरक सामग्री तैयार कर व्यापक रूप से प्रसारित की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसकी गौरवशाली परंपरा से परिचित हो सकें।

समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन की ली जानकारी
राज्यपाल ने नालंदा विश्वविद्यालय में समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़ने और उसकी सुविधाओं एवं संसाधनों का लाभ उठाने के लिए लोगों को सरल और सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, विचारधारा, इतिहास और समृद्ध सभ्यतागत विरासत के बारे में लोगों को अधिक जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अधिकारियों और कुलपतियों के भ्रमण का सुझाव
राज्यपाल ने सुझाव दिया कि अधिक से अधिक सरकारी अधिकारी नालंदा विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण करें और वहां चल रहे कार्यों से परिचित हों। इससे विश्वविद्यालय और सरकार के बीच रचनात्मक सहयोग के नए अवसर विकसित किए जा सकेंगे।
उन्होंने बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षकों को भी नालंदा विश्वविद्यालय का भ्रमण करने तथा वहां आयोजित कार्यशालाओं और शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।
राजगीर-बोधगया के विकास पर भी चर्चा
बैठक में राजगीर और बोधगया के पर्यटन स्थलों के विकास एवं सुधार से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि दोनों स्थानों के विकास से संबंधित परियोजनाएं भारत सरकार को भेजी जा चुकी हैं।
इसके अलावा नालंदा की समृद्ध बौद्धिक एवं सभ्यतागत विरासत से जुड़ी पांडुलिपियों के संरक्षण और संवर्धन सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।
वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में पहल
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर ज्ञान, नवाचार और उत्कृष्ट शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों एवं पहलों पर प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक के समापन से पूर्व विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास, अकादमिक विस्तार, विरासत संरक्षण और सरकार के साथ सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझावों एवं विचारों पर चर्चा की गई।

