प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने लोक शिकायत के 26 मामलों की सुनवाई की, अधिकांश का ‘ऑन-स्पॉट’ निस्तारण

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-एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

पटना, भोजपुर और रोहतास के मामलों पर कड़ा रुख; स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन व राजस्व पदाधिकारियों को तय सीमा में कार्रवाई के निर्देश

पटना, 24 सितंबर: बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रथम अपीलीय प्राधिकार के रूप में पटना प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने 26 महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। इस सुनवाई में मुख्य रूप से रोहतास, भोजपुर और पटना जिले से संबंधित जनहित एवं प्रशासनिक लापरवाही के परिवाद शामिल रहे। आयुक्त ने तत्परता दिखाते हुए अधिकांश मामलों का समाधान ‘ऑन-स्पॉट’ किया, जबकि विस्तृत जांच और रिपोर्ट की आवश्यकता वाले मामलों को संबंधित विभागाध्यक्षों व जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादित करने हेतु प्रेषित किया।

सुनवाई के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों पर आयुक्त ने कड़े निर्देश जारी किए:

  • शिक्षा व सेवा संबंधी मामले: रोहतास के संजय प्रताप तिवारी द्वारा सासाराम में शिक्षकों के योगदान में अनियमितता की शिकायत पर आयुक्त ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), रोहतास से विस्तृत जांच प्रतिवेदन तलब किया। वहीं, भोजपुर के अवधेश कुमार पांडे की सरकार के अंशदान की राशि यूटीआई (UTI) खाते में जमा न होने संबंधी परिवाद पर डीपीओ भोजपुर को 15 दिनों में निष्पादन सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
  • स्वास्थ्य एवं पर्यटन विकास: आरटीआई मंच (भोजपुर) द्वारा सूर्य मंदिर तालाब के चारों ओर सीढ़ी घाट निर्माण में अपूर्णता व गुणवत्ताहीनता की शिकायत पर निर्माण अभिलेख बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) को सौंपकर जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जिला स्वास्थ्य समिति आरा में 3 वर्षों से अधिक समय से जमे कर्मियों के स्थानांतरण पर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति को नियमानुकूल कदम उठाने को कहा गया। साथ ही, भोजपुर में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम व क्लीनिकों के खिलाफ सिविल सर्जन को 3 सप्ताह के भीतर जांच कर कार्रवाई करने की हिदायत दी गई।
  • परिवहन व भूमि सुधार (पटना): पटना जिले के चित्तरंजन कुमार की एम्बुलेंस का मालवाहक वाहन (कमर्शियल गुड्स व्हीकल) के रूप में गलत चालान काटे जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO), पटना को 15 दिनों के भीतर सुधार कर मामला निष्पादित करने का निर्देश मिला। वहीं दिलीप कुमार सिंह द्वारा दाखिल-खारिज अभिलेखों में हेराफेरी की शिकायत पर पटना के अपर समाहर्ता को जांच कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया।

प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि लोक शिकायत निवारण की सार्थकता तथ्यों की निष्पक्ष जांच, परिवादियों को ससमय सूचना और पारदर्शी कार्रवाई में ही निहित है।

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