सद्गुरु कबीर की वाणी श्रीकृष्ण के उपदेशों से प्रेरित: ब्रजेश मुनि

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– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

कबीर साईं मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर भजन संध्या और सत्संग का आयोजन

पटना, 04 सितंबर 2026: कबीरपंथी आश्रम स्थित कबीर साईं मंदिर प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर भजन संध्या एवं सत्संग का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मठ के महंत ब्रजेश मुनि ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस धरती पर अवतार लेकर आसुरी वृत्तियों का नाश किया और धर्म की पुनर्स्थापना की। सद्गुरु कबीर का संपूर्ण जीवन दर्शन और वाणी भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र तथा गीता के उपदेशों से गहरे रूप से प्रभावित हैं।

उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने जिस समतामूलक और भेदरहित समाज की सीख दी, वह गीता के प्रसिद्ध सूत्र ‘समत्वं योग उच्यते’ पर आधारित है। समभाव ही श्रेष्ठ योग है और इसे साधने से मानव जीवन सार्थक होकर आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर होता है।

बीजक और साखी में गीता दर्शन: हृदय नारायण झा

योग विशेषज्ञ हृदय नारायण झा ने कहा कि कबीर साहेब के बीजक, साखी, रमैनी और उलटबांसी में श्रीकृष्ण के कर्मयोग, सांख्ययोग और ज्ञानयोग का सहज दर्शन मिलता है। कबीर साहेब का लोकप्रिय पद ‘ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय’ वस्तुतः गीता के सत्रहवें अध्याय में वर्णित वाणी की सात्विक तपस्या का ही लोक स्वरूप है।

कार्यक्रम के दौरान स्वदेश पांडे एवं गोविंद भारद्वाज ने सुमधुर कृष्ण भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कबीरपंथी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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