– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
महिला पार्षदों की जगह बैठकों में पतियों की मौजूदगी पर आक्रोश, जनहित में सख्त प्रशासनिक आदेश की उठी मांग
बोकारो, 04 सितंबर 2026: चास नगर निगम क्षेत्र में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक बैठकों में उनकी गैर-मौजूदगी को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। हाल ही में जिला प्रशासन के साथ आयोजित महत्वपूर्ण बैठकों से सामने आई तस्वीरों के बाद यह मुद्दा गरमा गया है कि जनता द्वारा चुनी गईं महिला पार्षद स्वयं बैठकों से नदारद रहती हैं और उनकी जगह उनके पति अथवा कथित प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

सजग नागरिकों का कहना है कि जब देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति स्वयं पूरे देश का नेतृत्व कुशलतापूर्वक कर रही हैं, तो स्थानीय निकाय स्तर पर महिला जनप्रतिनिधियों का बैठकों में न पहुंचना उनकी क्षमता के हनन और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी का प्रमाण है। निगम का यह दुर्भाग्य बन चुका है कि अधिकांश निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों का निर्वहन खुद करने के बजाय ‘डुप्लीकेट’ प्रतिनिधियों को आगे कर रहे हैं।
नागरिकों का मानना है कि यदि केवल वास्तविक और निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही निगम के कार्यों और बैठकों में भाग लें, तो इससे न केवल निगम की कार्यप्रणाली में एक स्वस्थ व पारदर्शी माहौल बनेगा, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। जनता के दर्द और समस्याओं को निर्वाचित प्रतिनिधि ही सही ढंग से समझ और उठा सकते हैं।
इस संबंध में कोडरमा जिले में उपायुक्त कार्यालय (जिला पंचायत शाखा) द्वारा जारी किए गए एक सख्त आदेश का हवाला देते हुए चास नगर निगम में भी वैसी ही व्यवस्था लागू करने की पुरजोर मांग की जा रही है। उल्लेखनीय है कि कोडरमा प्रशासन ने प्रखंड एवं अन्य विभागीय बैठकों में महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पतियों के भाग लेने को नियम विरुद्ध करार देते हुए स्पष्ट आदेश दिया था कि किसी भी सूरत में प्रतिनिधियों या पतियों को अनुमति न दी जाए। यदि ऐसा होता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही संबंधित कार्यालय प्रधान की तय की जाएगी। बोकारो के जागरूक लोगों का कहना है कि जनहित, महिला सशक्तिकरण और नगर निगम की जवाबदेही तय करने के लिए बोकारो उपायुक्त को भी चास नगर निगम हेतु तत्काल ऐसा ही सख्त आदेश निर्गत करना चाहिए।
