-लाइव ख़बर नेशन || एस०एन०चतुर्वेदी
‘इतिहास लेखन की भारतीय परंपरा’ पर 16 तकनीकी सत्रों में गहन विमर्श, भारतीय दृष्टि अपनाने पर दिया गया बल
पटना/सासाराम, 05 अक्टूबर 2026 : रोहतास जिले के जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय 10वीं युवा इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत समापन हुआ। नई दिल्ली के माधव संस्कृति न्यास, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना और गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘इतिहास लेखन की भारतीय परंपरा’ था। इस बौद्धिक समागम में देश के 26 राज्यों से आए 416 प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर पूरे परिसर को लघु भारत का स्वरूप प्रदान किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अरविंद जामखेडकर ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन व विषय प्रवर्तन समन्वयक डॉ. राम प्रकाश शर्मा ने किया। क्षेत्रीय संगठन मंत्री सुरेश पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत संगोष्ठी प्रतिवेदन के अनुसार, दो दिनों में आयोजित 16 तकनीकी सत्रों के दौरान 400 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें भारतीय इतिहास लेखन की परंपरा, ऐतिहासिक स्रोत, इतिहास-बोध और भारतीय दृष्टि जैसे अहम विषयों पर शोधार्थियों ने अपने निष्कर्ष साझा किए।
समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल ने अपने बीज वक्तव्य में इतिहास लेखन में विशुद्ध भारतीय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। वहीं राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री संजय श्रीहर्ष और महासचिव हेमंत धींगरा मजूमदार ने संगठन के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए युवाओं को तथ्यपरक शोध के लिए प्रेरित किया। संगोष्ठी में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में युवा इतिहासकार परिषद के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. विकास कुमार सिंह, संयोजक डॉ. मुकेश कुमार, इतिहास संकलन समिति दक्षिण बिहार के पदाधिकारियों सहित विश्वविद्यालय प्रबंधन के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह, गोविंद नारायण सिंह, त्रिविक्रम नारायण सिंह और राष्ट्रीय संगठन मंत्री बाल मुकुंद पाण्डेय की अहम भूमिका रही।
