Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
बोकारो | 24 फरवरी 2026
झारखंड के बोकारो जिले की सियारी पंचायत ने पर्यावरण संरक्षण और लो-कार्बन विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। गोमिया प्रखंड अंतर्गत इस पंचायत की पहलों को मुंबई स्थित Jio World Convention Centre में आयोजित क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक सहभागिता के दम पर सियारी पंचायत ने यह साबित किया है कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान स्थानीय स्तर पर भी प्रभावी ढंग से संभव है।
पांच राज्यों के बीच गूंजी सियारी की पहल
पंचायत लीडिंग इंडियाज क्लाइमेट चार्ज सत्र में मुखिया रामवृक्ष मुर्मू ने बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों के साथ मंच साझा किया। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद पंचायत ने किस प्रकार पर्यावरण-अनुकूल विकास मॉडल को अपनाया और उसे सफल बनाया।
सौर ऊर्जा से बदली तस्वीर
बार-बार बिजली कटौती से शिक्षा और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था। समाधान के तौर पर पंचायत ने सीएसआर फंड के सहयोग से 72 सोलर स्ट्रीट लाइटें स्थापित कीं।
प्रमुख पहलें:
- विद्यालयों और सामुदायिक भवनों में सोलर सिस्टम की स्थापना
- मुख्य तालाब पर सोलर आधारित लिफ्ट सिंचाई पंप
- डीजल और अनियमित बिजली पर निर्भरता में कमी
- 800 से अधिक पौधों का रोपण
इन प्रयासों ने न केवल ऊर्जा संकट को कम किया, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाई।
हरित आवरण को मिला विस्तार
पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। District Mineral Foundation Trust और Birsa Munda Horticulture Mission के सहयोग से 2,880 आम के पौधों सहित 800 अन्य फलदार और छायादार पौधे लगाए गए।
यह पहल क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
तकनीकी सहयोग से मिली गति
इस सफलता के पीछे पंचायत हेल्प डेस्क, पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवाइजरी ग्रुप, दामोदर बचाओ अभियान और कॉमन ग्राउंड इनिशिएटिव जैसे संगठनों का तकनीकी मार्गदर्शन रहा। पूरी पहल कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित की गई, जिसका उद्देश्य पंचायतों को जलवायु अनुकूल विकास के लिए सक्षम बनाना है।
प्रशासन की सराहना
उपायुक्त अजय नाथ झा ने इस उपलब्धि पर पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि सियारी का मॉडल अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसे नवाचारों को प्रशासन हरसंभव सहयोग और प्रोत्साहन देगा।
स्थानीय पहल, वैश्विक संदेश
सियारी पंचायत की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि स्थानीय नेतृत्व, सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी सहयोग का समन्वय हो, तो ग्रामीण क्षेत्र भी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ मजबूत भूमिका निभा सकते हैं।
बोकारो की यह पहल न केवल झारखंड, बल्कि देशभर की पंचायतों के लिए एक मार्गदर्शक मॉडल के रूप में उभर रही है।
