PLI निर्देश पर बैंक यूनियनों का तीखा विरोध

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UFBU की मांग है कि स्थापित परामर्श तंत्र के माध्यम से समाधान होने तक इसके क्रियान्वयन को स्थगित रखा जाए

Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

नई दिल्ली | 18 मार्च 2026

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (PLI) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। United Forum of Bank Unions (UFBU) ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी हालिया निर्देश पर कड़ा विरोध जताया है और इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

Department of Financial Services (DFS) ने 18 मार्च 2026 को निर्देश जारी कर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को स्केल IV से लेकर स्केल VIII तक के अधिकारियों और State Bank of India के वरिष्ठ अधिकारियों को संशोधित PLI योजना के तहत प्रोत्साहन देने की सलाह दी है।

यह योजना पहले 19 नवंबर 2024 को संशोधित रूप में जारी की गई थी, जिसे अब लागू करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।

यूनियनों की मुख्य आपत्तियां

UFBU ने इस निर्देश को कई आधारों पर अनुचित और जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है।

प्रमुख आपत्तियां:

  • मामला पहले से सुलह प्रक्रिया में लंबित है
  • 9 मार्च 2026 को हुई बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी है
  • द्विपक्षीय समझौते की अनदेखी
  • एकतरफा लागू करने का प्रयास

“सुलह प्रक्रिया कमजोर होगी”

यूनियन का कहना है कि जब मामला Chief Labour Commissioner Office के समक्ष विचाराधीन है, तब इस तरह का निर्देश सुलह प्रक्रिया को कमजोर करता है और औद्योगिक संबंधों पर नकारात्मक असर डालता है।

वेतन असमानता पर बड़ा सवाल

UFBU ने इस योजना के वित्तीय और संरचनात्मक प्रभावों पर भी गंभीर चिंता जताई है।

वर्तमान बनाम प्रस्तावित PLI:

  • कर्मचारियों/मिड-लेवल अधिकारियों: अधिकतम 15 दिन का वेतन
  • वरिष्ठ अधिकारियों (स्केल IV+): 365 दिन तक का वेतन

यूनियन के अनुसार यह अंतर:

  • कार्यबल में असमानता बढ़ाएगा
  • टीम भावना को कमजोर करेगा
  • औद्योगिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाएगा

“ऊपर से थोपी गई योजना”

यूनियनों ने स्पष्ट कहा कि यह योजना कर्मचारियों की मांग पर आधारित नहीं है, बल्कि इसे ऊपर से लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।

संभावित प्रभाव:

  • कार्यबल में विभाजन
  • मनोबल में गिरावट
  • अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा
  • संस्थागत संतुलन पर असर

वैश्विक उदाहरण भी दिए

UFBU ने कहा कि “फोर्स्ड रैंकिंग” और “बेल कर्व” आधारित प्रदर्शन मूल्यांकन मॉडल को दुनिया की कई बड़ी कंपनियां पहले ही छोड़ चुकी हैं।

उदाहरण:

  • Microsoft
  • Adobe
  • Accenture
  • Deloitte

भारत में भी Axis Bank और ICICI Bank जैसे बैंक इस मॉडल से दूरी बना चुके हैं।

आंदोलन की चेतावनी

यूनियन ने साफ संकेत दिया है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो बैंक कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और वैधानिक आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

क्या है यूनियन की मांग

UFBU ने सरकार और बैंक प्रबंधन से अपील की है कि:

  • 18 मार्च 2026 के निर्देश को तत्काल स्थगित किया जाए
  • PLI मुद्दे को सुलह और परामर्श तंत्र के जरिए सुलझाया जाए
  • मौजूदा समझौतों और औद्योगिक संतुलन को बरकरार रखा जाए

यह विवाद आने वाले दिनों में बैंकिंग सेक्टर में बड़े औद्योगिक तनाव का कारण बन सकता है, यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया।

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