– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
राष्ट्रीय परामर्श में केंद्रीय मंत्री ने नागरिक समाज संगठनों की भूमिका को सराहा, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों पर दिया जोर
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार और सामाजिक संगठन मिलकर वर्ष 2030 तक “बाल विवाह मुक्त भारत” के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह उन्मूलन के लिए सरकार एवं नागरिक समाज के संयुक्त प्रयास लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।
नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित “Ensuring a Child Rights, Potential and Prosperity” विषयक चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सावित्री ठाकुर ने देशभर से आए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के प्रतिनिधियों की सराहना की। इस राष्ट्रीय परामर्श में देश के 782 जिलों से प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकार और सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयासों से इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का जीवन बचाना सबसे बड़ा मानवीय कार्य है। विशेष रूप से मानव तस्करी और यौन शोषण की शिकार बच्चियों को सुरक्षित जीवन दिलाने में कार्यरत स्वयंसेवक समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2030 तक बाल विवाह के उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं और अभियान शुरू किए हैं। उन्होंने “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान को आगे बढ़ाने में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में संगठन की भूमिका सदैव याद रखी जाएगी।
कार्यक्रम में “एमपीज़ फॉर चिल्ड्रेन” के संयोजक एवं लोकसभा में तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता लावु कृष्णा देवरायलु ने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ शुरू हुआ यह अभियान अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है। उन्होंने इसे एक असाधारण पहल बताते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि सामूहिक प्रयासों से बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए संसद में निजी विधेयक प्रस्तुत किए जाने का भी उल्लेख किया।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक एवं बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु ने कहा कि 27 नवंबर 2024 को शुरू हुआ “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान अब राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार, नागरिक समाज, शैक्षणिक संस्थानों, समुदायों और युवाओं के संयुक्त प्रयासों से बच्चों के अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
भुवन ऋभु ने बताया कि किसी गांव में एक भी बाल विवाह रोकना केवल एक बच्चे की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे समाज को सकारात्मक संदेश देना है। उन्होंने कहा कि सरकार के सहयोग से पिछले तीन वर्षों में 5.5 लाख से अधिक बाल विवाह रोके जा चुके हैं, जो इस अभियान की बड़ी उपलब्धि है।

