तिरुपति में उत्कर्ष महोत्सव का भव्य शुभारंभ

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– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

संस्कृत विरासत के साथ ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक अनुसंधान को जोड़ने पर जोर

तिरुपति : 21 अगस्त 2026

राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति, श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उत्कर्ष महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया। समारोह में संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के समन्वय पर चर्चा हुई।

अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संस्कृत भारत की गौरवशाली विरासत के साथ ज्ञान-विज्ञान की भी भाषा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान और भविष्य से जोड़ने वाली सशक्त भाषा है। वेद, आयुर्वेद, मीमांसा, अर्थशास्त्र, ज्योतिष और वास्तुशास्त्र सहित अनेक ज्ञान-विधाओं का समृद्ध भंडार संस्कृत परंपरा में सुरक्षित है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण से भाषा और वाणी में स्पष्टता, माधुर्य और प्रभाव आता है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ विश्व स्तर पर भी संस्कृत के प्रति रुचि और सम्मान बढ़ रहा है।

मेघवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिकता और नवीनता के साथ प्राचीन ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना जरूरी है। उन्होंने भारतीय ज्ञान-संपदा के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के बीच मजबूत सेतु का काम कर सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत ग्रंथों के गंभीर अध्ययन के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में समझने और नए शोध की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

मेघवाल ने संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शोध, पुस्तकों के प्रकाशन, संगोष्ठियों, सेमिनारों और कार्यशालाओं को बढ़ावा देने के साथ संस्कृत एवं प्राकृत भाषाओं तथा प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और सूचीकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि संस्कृत मानव सभ्यता के निर्माण तथा ज्ञान-विज्ञान की आधारभूत भाषा रही है। संस्कृत साहित्य और शास्त्रों में उपलब्ध ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान और समकालीन जरूरतों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने उत्कर्ष महोत्सव को तीनों संस्कृत विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और अनुसंधानात्मक सहयोग को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के विशाल भंडार को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ वैश्विक स्तर पर भी उसे प्रतिष्ठित किया जाए।

समारोह में विभिन्न वक्ताओं ने संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया। वक्ताओं ने संस्कृत विश्वविद्यालयों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के बीच सेतु बनकर नवीन शोध, अकादमिक नवाचार और ज्ञान के वैश्विक प्रसार की दिशा में काम करने की आवश्यकता बताई।

श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने उत्कर्ष महोत्सव को संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा और अकादमिक उत्कृष्टता के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजन संस्थानों, विद्वानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को संवाद एवं विचार-विनिमय का अवसर देते हैं तथा संस्कृत के समृद्ध ज्ञान को व्यापक समाज तक पहुंचाने में सहायक होते हैं।

समारोह में तीनों संस्कृत विश्वविद्यालयों के अधिकारी, विद्वान, शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। उत्कर्ष महोत्सव 2026 का शुभारंभ संस्कृत की समृद्ध परंपरा, भारतीय ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के समन्वय के संकल्प के साथ हुआ।