नाटक ने झकझोरा, रिश्तों की बदलती तस्वीर दिखाई

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रंजित प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट

माता-पिता की उपेक्षा और बुजुर्गों के अकेलेपन को मंच पर किया गया जीवंत, भावुक हुए दर्शक

फुलवारी शरीफ | 30 अगस्त 2026: सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच की ओर से वाल्मी, फुलवारी शरीफ में महेश चौधरी लिखित एवं मिथिलेश कुमार पांडे निर्देशित नाटक ‘रिश्तों की बदलती तस्वीर’ का मार्मिक मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से बदलते पारिवारिक रिश्तों, बुजुर्गों के प्रति घटती संवेदनशीलता और माता-पिता के प्रति संतानों के दायित्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

नाटक की कहानी उन माता-पिता के इर्द-गिर्द बुनी गई, जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जीवनभर संघर्ष करते हैं। वे अपनी इच्छाओं और सुख-सुविधाओं को त्यागकर बच्चों की परवरिश और शिक्षा में पूरी जिंदगी लगा देते हैं। उनकी उम्मीद रहती है कि जीवन की ढलती उम्र में वही संतान उनका सहारा बनेगी।

मंचन के दौरान दिखाया गया कि जिस पिता ने बच्चे का हाथ पकड़कर उसे चलना सिखाया, पढ़ाया-लिखाया और आत्मनिर्भर बनाया, वही वृद्धावस्था में उपेक्षा और अकेलेपन का शिकार हो जाता है। परिस्थितियां यहां तक पहुंचती हैं कि उसे वृद्धाश्रम में छोड़ दिया जाता है।

पिता की अंतिम विदाई ने दर्शकों को किया भावुक

नाटक के भावुक प्रसंग में वृद्ध पिता जीवन के अंतिम समय में अपने बेटे को याद करता है। बेटे की ओर से व्यस्तता और दूरी का हवाला देकर आने में असमर्थता जताई जाती है। इसके बाद पिता की मृत्यु हो जाती है। वृद्धाश्रम प्रबंधन और स्थानीय लोगों के सहयोग से उनका अंतिम संस्कार किया जाता है।

इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। नाटक ने यह सवाल भी खड़ा किया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में कहीं पारिवारिक रिश्तों की संवेदना तो नहीं खोती जा रही है। प्रस्तुति के माध्यम से संदेश दिया गया कि आज जिस उपेक्षा का सामना माता-पिता कर रहे हैं, भविष्य में वही स्थिति उनकी संतानों के सामने भी आ सकती है।

कलाकारों के प्रभावी अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा। नाटक में महेश चौधरी, मिथिलेश कुमार पांडे, सौरभ, करण, देवदर्शन, अंजनी कुमार वर्मा, अंकित, आद्विक और सक्षम कुमार ने विभिन्न भूमिकाओं में अभिनय किया।