– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher
अंतर-सदन समूह नृत्य प्रतियोगिता में भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक, जमुना और झेलम सदन बने संयुक्त विजेता
बोकारो, 06 अगस्त। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के प्राइमरी विंग के तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘धरोहर’ का समापन गुरुवार को अंतर-सदन समूह नृत्य प्रतियोगिता के साथ उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। कक्षा दो से पांचवीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और ‘अनेकता में एकता’ की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर जमुना और झेलम सदन को संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
प्रतियोगिता में विद्यालय के सभी छह सदनों के विद्यार्थियों ने विभिन्न राज्यों के पारंपरिक लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुति देकर दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और प्रभावशाली मंच सज्जा के बीच नन्हे कलाकारों ने अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, लोककला और सामाजिक परंपराओं का सजीव चित्रण किया।

कार्यक्रम की शुरुआत चेनाब सदन ने पंजाब के लोकप्रिय भांगड़ा नृत्य से की। इसके बाद जमुना सदन ने लंबाडी नृत्य के माध्यम से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और राजस्थान की बंजारा जनजाति की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। झेलम सदन ने हरियाणा की लोक संस्कृति और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया, जबकि रावी सदन ने संबलपुरी नृत्य के जरिए ओडिशा की समृद्ध लोक संस्कृति का परिचय कराया। गंगा सदन ने पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित गोमीरा नृत्य प्रस्तुत कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया। समापन प्रस्तुति में सतलज सदन ने गरबा नृत्य के माध्यम से गुजरात की सांस्कृतिक रंगत, उत्सवधर्मिता और सामाजिक एकता का मनमोहक प्रदर्शन किया।
परिधान, भाव-भंगिमा, समन्वय, शारीरिक संतुलन, कोरियोग्राफी और मंच प्रस्तुति जैसे विभिन्न मानकों के आधार पर जमुना एवं झेलम सदन संयुक्त रूप से प्रथम, सतलज एवं रावी सदन संयुक्त रूप से द्वितीय तथा गंगा एवं चेनाब सदन संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि नृत्य केवल शारीरिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भावनाओं, संवेदनाओं और संस्कृति को कलात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करती हैं। उन्होंने तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव की सफलता पर सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों, शिक्षकों और आयोजकों को बधाई दी।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन नितेश कुमार, तनुश्री घोष एवं स्मृति रॉय ने किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन कक्षा पांच के छात्र पुष्पेश शेखर और छात्रा स्वधा प्रियवि ने किया।

