बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी

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एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

पटना जिले में 25 सामुदायिक रसोई, 20 मेडिकल कैंप, 28 एम्बुलेंस और 166 नौकाएं तैनात

पटना, 14 सितम्बर। जिले से होकर गुजरने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

डीएम कुंदन कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जहां जिस प्रकार की आवश्यकता हो, वहां उसी के अनुरूप तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने तथा प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

25 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में जिले में कुल 25 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर अब तक 70 हजार से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है।

सामुदायिक रसोई केंद्र बाढ़ अंचल में 1, दानापुर में 1, पाटलिपुत्रा में 2, अथमलगोला में 1, बख्तियारपुर में 3, मोकामा में 8, मनेर में 2, संपतचक में 1, दीदारगंज में 3, फुलवारीशरीफ में 1 और पुनपुन में 1 संचालित हैं।

सभी सामुदायिक रसोई केंद्रों के आसपास आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

20 मेडिकल कैंप और 28 एम्बुलेंस तैनात

बाढ़ प्रभावित सामुदायिक रसोई केंद्रों के आसपास कुल 20 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए 28 एम्बुलेंस और 6 बोट एम्बुलेंस तैनात की गई हैं।

बोट एम्बुलेंस बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भ्रमण कर जरूरत के अनुसार लोगों को चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रही हैं। सभी मेडिकल कैंपों में जीवन रक्षक दवाओं के साथ सर्पदंश और कुत्ता काटने की दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों और अन्य जरूरतमंदों के लिए आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी सिविल सर्जन द्वारा की जा रही है।

स्वच्छ पेयजल और अस्थायी शौचालय की व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित लोगों को पेयजल की समस्या न हो, इसके लिए पीएचईडी की ओर से पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में अस्थायी शौचालय भी लगाए गए हैं।

नगर निगम द्वारा सभी सामुदायिक केंद्रों पर नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

पशुओं के लिए 15 शिविर

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की सुरक्षा और उपचार के लिए 15 पशु शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा और इलाज की व्यवस्था की गई है।

प्रभावित लोगों के बीच अब तक 3,000 पॉलीथीन शीट्स का भी वितरण किया जा चुका है।

तटबंधों की लगातार निगरानी

तटबंधों की लगातार निगरानी के साथ आवश्यकता के अनुसार मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य तेज किया गया है। जिन स्थानों पर तटबंधों में रिसाव अथवा ओवरफ्लो की स्थिति उत्पन्न हुई है, वहां जल संसाधन विभाग की टीम तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई कर रही है।

जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें तटबंधों की लगातार निगरानी कर रही हैं। बाढ़ के कारण जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां आवश्यकतानुसार मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। जिन स्थानों पर अभी पानी जमा है, वहां जलस्तर कम होने के बाद सड़कों की मरम्मत कर आवागमन सुचारु किया जाएगा।

सुरक्षित आवागमन के लिए 166 नौकाएं तैनात

बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता और सुरक्षित आवागमन के लिए जिले में कुल 166 नौकाएं तैनात की गई हैं। ये नौकाएं लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकालकर ऊंचे स्थानों तक पहुंचाने और आवश्यक आवागमन में सहायता कर रही हैं।

नौकाओं की तैनाती अथमलगोला में 7, बख्तियारपुर में 21, बाढ़ में 8, दानापुर में 25, मनेर में 25, पाटलिपुत्रा में 19, पुनपुन में 3, फतुहा में 30, दीदारगंज में 18, मोकामा में 6, पालीगंज में 2 और फुलवारीशरीफ में 2 की गई है।

इसके अतिरिक्त लोगों की सहायता के लिए एसडीआरएफ की 8 टीमें और एसएसबी की 2 टीमें अधिक आवागमन वाले एवं संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।

घबराएं नहीं, प्रशासन पूरी तरह तैयार : डीएम

डीएम कुंदन कुमार ने बाढ़ प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हर समय तैयार है।

उन्होंने लोगों से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध राहत एवं बचाव संसाधनों का उपयोग करने की अपील की है।

जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति के अनुसार राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज किया जा रहा है।

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