बिहार विधान परिषद के सभापति पद पर जद(यू) की दावेदारी तय, प्रो. रामवचन राय सबसे आगे

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-एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे से सियासी हलचल तेज, सत्ता संतुलन साधने के लिए जद(यू) को मिल सकती है कमान

पटना, 23 सितंबर: बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह द्वारा सभापति पद से अचानक इस्तीफा दिए जाने के बाद सत्ता के समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा आलाकमान के निर्देशानुसार दिए गए इस इस्तीफे के बाद अब यह संवैधानिक पद गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल जद(यू) के खाते में जाना तय माना जा रहा है।

राज्य की मौजूदा सियासी तस्वीर में मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा का प्रभाव होने के कारण सत्ता का संतुलन एकतरफा नजर आ रहा था। सहयोगी दल जद(यू) द्वारा संतुलन साधने के लिए लगातार विधान परिषद सभापति पद की मांग उठाई जा रही थी। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी सहमति के बाद अवधेश नारायण सिंह का इस्तीफा सामने आया।

सूत्रों के अनुसार, नए सभापति के रूप में मौजूदा उपसभापति प्रो. (डॉ.) रामवचन राय का नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरा है। वरिष्ठ साहित्यकार और पूर्व प्राध्यापक रहे प्रो. राय को पहले कार्यकारी सभापति का दायित्व सौंपे जाने और बाद में औपचारिक रूप से सभापति चुने जाने की पूरी संभावना है। उनका वर्तमान कार्यकाल मार्च 2027 तक है।

11 अक्टूबर 1943 को जन्मे प्रो. रामवचन राय पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त प्रख्यात व्याख्याता एवं साहित्यकार रहे हैं। जेपी आंदोलन से जुड़े रहे प्रो. राय पूर्व में राजद के थिंक टैंक का हिस्सा थे और 2004 में पहली बार एमएलसी बने। वर्ष 2011 में वे नीतीश कुमार के नेतृत्व में जद(यू) में शामिल हुए। मार्च 2021 में राज्यपाल कोटे से मनोनीत होने के बाद जुलाई 2024 में वे निर्विरोध उपसभापति निर्वाचित हुए थे। अनुभव, विद्वता और गठबंधन संतुलन के लिहाज से प्रो. राय का चयन एक मजबूत सियासी कदम साबित हो सकता है।

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