– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
नाम परिवर्तन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज; नगर परिषद की ओर से ‘मगधद्वार’ नाम का प्रस्ताव, मंत्री संतोष कुमार सुमन के ‘नीतीशपुर’ नाम के सुझाव से बढ़ी चर्चा
पटना/बख्तियारपुर, 11 सितंबर 2026 : दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग के बीच मगध और झारखंड को सीधे जोड़ने वाले महत्वपूर्ण बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर गरमा गई है। बख्तियारपुर का नाम बदलकर मगधद्वार, पं. शीलभद्रेयाजी या नीतीशपुर किए जाने की चर्चा के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन नामों में से किस नाम पर सार्वजनिक मुहर लगेगी।
बिहार में बख्तियारपुर का नाम बदले जाने का मुद्दा काफी पुराना है, लेकिन एक बार फिर यह सुर्खियों में आ गया है। नाम परिवर्तन की मांग को लेकर वर्षों से स्थानीय स्तर पर अलग-अलग संगठनों और आम लोगों की ओर से आवाज उठती रही है। समय-समय पर शहर के लिए अलग-अलग नाम भी चर्चा में आते रहे हैं।
नगर परिषद ने रखा ‘मगधद्वार’ का प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार, बख्तियारपुर नगर परिषद के सभापति पवन कुमार ने सर्वसम्मति से बख्तियारपुर का नाम ‘मगधद्वार’ किए जाने को लेकर गंभीरता से विचार-विमर्श किया है। उन्होंने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से भी आग्रह किया है। नगर परिषद की ओर से नाम परिवर्तन को लेकर पहल किए जाने के बाद इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हुई।
हालांकि, हाल के दिनों में बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन के बख्तियारपुर दौरे के दौरान नाम परिवर्तन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया। उन्होंने बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ किए जाने की बात कही। इसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई है।
पं. शीलभद्रेयाजी के नाम पर भी उठी मांग
वहीं, कुछ लोगों की ओर से बख्तियारपुर का नाम बदलकर महान स्वतंत्रता सेनानी पं. शीलभद्रेयाजी के नाम पर रखे जाने की मांग की जा रही है। ऐसे में नाम परिवर्तन की चर्चा अब तीन प्रमुख नामों—मगधद्वार, पं. शीलभद्रेयाजी और नीतीशपुर—के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है।
अब सवाल यह है कि क्या विदेशी आक्रांता के नाम पर बने बख्तियारपुर जंक्शन का नाम वास्तव में बदलेगा? अगर बदलेगा तो नया नाम क्या होगा? और सबसे अहम सवाल यह है कि इस मुद्दे पर बख्तियारपुर के स्थानीय लोगों की राय क्या है?
स्थानीय लोगों की राय बंटी
इन्हीं सवालों को लेकर स्थानीय लोगों से बातचीत की गई तो नाम परिवर्तन को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। कुछ लोगों ने बख्तियारपुर का नाम बदलने का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने मौजूदा नाम को ही बनाए रखने की बात कही। लोगों की अलग-अलग राय से स्पष्ट है कि नाम परिवर्तन का मुद्दा अभी भी स्थानीय स्तर पर बहस के केंद्र में है।
कई लोगों का कहना है कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा मगधद्वार का नाम बदलकर बख्तियारपुर रखा गया था, जो गुलामी की झलक को दर्शाता है। ऐसे लोगों का मानना है कि इसका नाम बदलकर पुनः मगधद्वार किया जाना चाहिए।
कुछ लोगों ने इससे आगे सुझाव देते हुए कहा कि बख्तियारपुर नगर परिषद क्षेत्र के एक ओर पं. शीलभद्रेयाजी नगर और दूसरी ओर नीतीश नगर किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इससे सभी पक्षों के बीच सामंजस्य बना रहेगा और बिहार के इतिहास में एक नया अध्याय भी जुड़ सकता है।

सभापति के कार्यकाल में नाम परिवर्तन की उम्मीद
हालांकि, बख्तियारपुर नगर परिषद क्षेत्र के कई लोगों ने सभापति पवन कुमार के विकास कार्यों और निर्णयों की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि सभापति पवन कुमार के कार्यकाल में ही बख्तियारपुर के नाम परिवर्तन जैसा ठोस और महत्वपूर्ण कार्य संभव हो सकता है।
फिलहाल, बख्तियारपुर के नाम परिवर्तन को लेकर मगधद्वार, पं. शीलभद्रेयाजी और नीतीशपुर तीनों नाम चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों की अलग-अलग राय और राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर जारी बहस के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इस प्रस्ताव को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है और आखिरकार बख्तियारपुर की पहचान किस नए नाम के साथ सामने आती है।
