बाढ़ नगर परिषद में विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी, भुगतान के बाद भी काम अधूरा

Live ख़बर

-एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

18 साल पुरानी योजनाएं कागजों में सीमित, लावारिस पड़े मोबाइल टॉयलेट और अनुपयोगी यात्री शेड उजागर कर रहे अव्यवस्था

पटना/बाढ़, 01 अक्टूबर 2026 : पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल मुख्यालय में नगर परिषद की योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितता और लापरवाही का मामला सामने आया है। विकास के दावों के बीच धरातल पर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं आज भी नदारद हैं। नगर क्षेत्र में कई ऐसी योजनाएं हैं जिनका भुगतान हो चुका है, लेकिन वे पूरी नहीं हो सकी हैं।

वित्तीय अनियमितता का सबसे बड़ा उदाहरण पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि से जुड़ा है। नगर परिषद कार्यालय से लेकर अनुमंडल पदाधिकारी आवास तक 7 लाख 84 हजार रुपये की लागत से 14 यात्री विश्राम कुर्सियों के निर्माण की योजना बनाई गई थी। 28 अगस्त 2008 को तत्कालीन विधायक ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ज्ञानू ने इसका शिलान्यास किया था। 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह योजना पूरी नहीं हुई और विरोध के बाद महज दो जगहों पर पिलर खड़े कर छोड़ दिए गए।

इसके अलावा स्वच्छ भारत अभियान के तहत घरों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थायी शौचालय होने के बावजूद बड़ी राशि खर्च कर मोबाइल टॉयलेट वैन खरीदे गए। देखरेख के अभाव में ये चलंत शौचालय बांध रोड पर गंगा किनारे लावारिस हालत में सड़ रहे हैं।

योजना चयन में मनमानी का आलम यह है कि एनएच-31 पर चर्च स्कूल के पास अनुपयोगी जगह पर यात्री शेड बनाए गए, जिसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा। इनमें से कई शेड सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़कर तोड़े जा चुके हैं, जबकि जगन्नाथ स्कूल पार्क जैसी जरूरी जगहों पर यात्री शेड का अभाव है। स्थानीय नागरिकों में इस प्रशासनिक अनदेखी को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Verified by MonsterInsights