निर्माण श्रमिकों के लिए शुरू होगी ‘श्रमिक अतिथिशाला’ और ‘भोजशाला’ योजना

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रंजीत प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट

पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को ₹5 में मिलेगा पौष्टिक भोजन, पटना के नौ प्रमुख स्थानों पर शुरू होगी श्रमिक अतिथिशाला

पटना, 29 जुलाई। बिहार सरकार ने राज्य के निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘श्रमिक अतिथिशाला योजना’ और ‘भोजशाला (कैंटीन) योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के अंतर्गत बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित इन योजनाओं का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों को सम्मानजनक आवास, सस्ता एवं पौष्टिक भोजन तथा बेहतर सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने बताया कि रोजगार की तलाश में शहरों में आने वाले निर्माण श्रमिकों तथा अन्य राज्यों से लौटने वाले बिहार के श्रमिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक अस्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए ‘श्रमिक अतिथिशाला योजना’ प्रारंभ की जा रही है। प्रथम चरण में पटना के पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया, पाटलिपुत्र स्टेशन, बैरिया जीरोमाइल, आईएसबीटी-कंकड़बाग, दानापुर जंक्शन, सगुना मोड़, बिहटा कॉरिडोर, नौबतपुर और दीदारगंज में अतिथिशालाओं का संचालन किया जाएगा। बाद में इस सुविधा का विस्तार राज्य के अन्य जिलों तक किया जाएगा।

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उन्होंने बताया कि अतिथिशालाओं में महिला एवं पुरुष श्रमिकों के लिए अलग-अलग डॉर्मिटरी की व्यवस्था होगी। महिलाओं के लिए 50 तथा पुरुषों के लिए 100 बेड उपलब्ध रहेंगे। श्रमिक सामान्य परिस्थितियों में 7 से 10 दिनों तक यहां ठहर सकेंगे, जबकि विशेष परिस्थितियों में यह अवधि बढ़ाई भी जा सकेगी। अतिथिशालाएं 24 घंटे संचालित होंगी और यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ अनुदानित दर पर भोजन तथा नाममात्र शुल्क पर आवास उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया जाएगा, जिसके लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मंत्री ने बताया कि ‘भोजशाला (कैंटीन) योजना’ के तहत बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल के निकट मात्र ₹5 में स्वच्छ, ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। प्रथम चरण में पटना के प्रमुख श्रमिक एवं निर्माण क्षेत्रों में 10 भोजशालाएं स्थायी कैंटीन और मोबाइल फूड वैन के माध्यम से संचालित की जाएंगी। प्रत्येक भोजशाला में प्रतिदिन 300 नाश्ते और 300 दोपहर के भोजन सहित कुल 600 भोजन उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि भोजन की शेष लागत का वहन बोर्ड करेगा।

उन्होंने कहा कि भोजन अर्ध-स्वचालित केंद्रीकृत रसोईघर में खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा तथा इसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी। प्रथम चरण में पटना जंक्शन, पाटलिपुत्र जंक्शन, एम्स, फुलवारीशरीफ, बिहटा, सगुना मोड़, नौबतपुर, दानापुर सहित श्रमिक बहुल क्षेत्रों को योजना में शामिल किया गया है। योजना की सफलता के आधार पर इसे भविष्य में राज्य के अन्य जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।

अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि निर्माण श्रमिक राज्य के विकास की मजबूत नींव हैं और उनके स्वास्थ्य, सम्मान तथा कार्यक्षमता को बेहतर बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं तथा श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग श्रमिकों के कल्याण के लिए नई योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।