भारतीय मनोविज्ञान दिवस पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित

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– रंजीत प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट

जगत नारायण लाल कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा और मनोवैज्ञानिकों के योगदान पर छात्रों ने रखे प्रभावशाली विचार

खगौल, 29 जुलाई। जगत नारायण लाल कॉलेज, खगौल के काउंसलिंग सेल एवं मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय मनोविज्ञान दिवस के अवसर पर बुधवार को भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय “भारतीय मनोवैज्ञानिकों का योगदान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा में मनोविज्ञान की भूमिका” रखा गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय मनोविज्ञान की समृद्ध परंपरा पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ काउंसलिंग सेल की नोडल ऑफिसर डॉ. किरण बाला के संबोधन से हुआ। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में मनोविज्ञान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा में मन, व्यवहार और व्यक्तित्व के अध्ययन की समृद्ध विरासत रही है, जो आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है।

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मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्राध्यापिका डॉ. अर्चना भारती ने भारतीय मनोविज्ञान के विकासक्रम पर विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. नरेंद्र सेन गुप्ता, डॉ. गिरीन्द्रशेखर बोस और डॉ. जे. पी. दास सहित अनेक भारतीय मनोवैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को भारत में मनोविज्ञान के इतिहास, उसके विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा में उसकी भूमिका से भी अवगत कराया।

भाषण प्रतियोगिता में कुंदन और कोमल ने भारतीय मनोविज्ञान के जनक माने जाने वाले डॉ. नरेंद्र सेन गुप्ता के योगदान पर अपने विचार रखे। प्रीति और अमृता ने डॉ. गिरीन्द्रशेखर बोस के कार्यों को रेखांकित किया, जबकि कल्याणी, गुड़िया और सोनाली ने डॉ. जे. पी. दास के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया। रजनी और ऋतिक ने डॉ. दुर्गानंद सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अहम सत्यम ने किया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय मनोवैज्ञानिकों के योगदान, भारतीय मनोविज्ञान की ऐतिहासिक विरासत तथा आधुनिक संदर्भ में उसकी उपयोगिता को समझने का अवसर मिला।