विश्व आदिवासी दिवस पर थिरका बोकारो

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Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher

बोकारो आदिवासी महोत्सव-2026 में पारंपरिक परिधानों में दिखा अपनत्व, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प

बोकारो, 9 अगस्त। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) में आयोजित बोकारो आदिवासी महोत्सव-2026 में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। ढोल-मांदर की थाप, नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक स्वागत संगीत से पूरा परिसर जीवंत हो उठा। कार्यक्रम में आदिवासी अस्मिता के सम्मान के साथ जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प भी सामने आया।

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक, बोकारो विधायक श्वेता सिंह, उपायुक्त अजय नाथ झा, एसपी नाथू सिंह मीणा और डीडीसी शताब्दी मजूमदार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया।

आयोजन की विशेष तस्वीर तब सामने आई, जब जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी पारंपरिक आदिवासी परिधान में कार्यक्रम में शामिल हुए। अधिकारियों की यह पहल आदिवासी समाज के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता का संदेश देती नजर आई।

आदिवासी जीवन-दर्शन से दुनिया को सीखने की जरूरत : योगेंद्र प्रसाद

मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों, पहचान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट का सामना कर रही है। ऐसे समय में प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने वाली आदिवासी जीवनशैली पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति को सम्मान दिया है। पर्यावरण संरक्षण आज वैश्विक चुनौती बन चुका है, इसलिए आदिवासी समाज के पारंपरिक जीवन-दर्शन और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण से सीख लेने की आवश्यकता है।

मंत्री ने कहा कि सरकार आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता है। गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ जल संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी लगातार काम किया जा रहा है।

आदिवासी चेतना को महसूस करने का मंच : श्वेता सिंह

बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने कहा कि आदिवासी महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना, संस्कृति और जीवन-दर्शन को समझने का अवसर है। उन्होंने कहा कि धन और सुख-सुविधाओं की दौड़ में मनुष्य अपनी मिट्टी और प्रकृति से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की आदिवासी भावना को समझना और जीवन में अपनाना जरूरी है।

आदिवासी समाज से सीखने की जरूरत : डीसी

उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि आदिवासी समाज को कुछ दिखाने या सिखाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि हम उनसे सीखें और उनकी जीवनशैली को समझें। उन्होंने कहा कि विकास की जिस धारा को हम आदिवासी समाज के लिए उचित मानते हैं, जरूरी नहीं कि वह उनकी दृष्टि से भी सही हो।

उपायुक्त ने कहा कि आदिवासी समाज की इच्छाओं, परंपराओं और स्वाभिमान का सम्मान करते हुए विकास की दिशा तय की जानी चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि चंदनकियारी सहित पूरे जिले में आदिवासी कला, सोहराय पेंटिंग और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।

बोकारो आदिवासी महोत्सव-2026 ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यह संदेश भी दिया कि आदिवासी परंपराएं केवल विरासत नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और संतुलित जीवन का महत्वपूर्ण संदेश अपने भीतर समेटे हुए हैं।