बीएसएल की स्वदेशी तकनीक से बचेंगे सालाना 100 करोड़

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– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट

ब्लास्ट फर्नेस-3 में कोल डस्ट इंजेक्शन प्रणाली की सफल इन-हाउस कमीशनिंग

बोकारो, 22 अगस्त: बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने स्वदेशी इंजीनियरिंग और तकनीकी नवाचार के बल पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संयंत्र ने बीपीएससीएल से बारीक पिसे कोयले (पुल्वराइज्ड कोल) को सीधे ब्लास्ट फर्नेस-3 तक पहुँचाने वाली ‘कोल डस्ट इंजेक्शन न्यूमैटिक कन्वेयिंग प्रणाली’ की सफल इन-हाउस कमीशनिंग पूरी कर ली है। भारतीय इस्पात उद्योग में अपनी तरह का यह पहला और अनूठा तकनीकी प्रयास है, जिससे उत्पादन लागत घटाने में बड़ी मदद मिलेगी।

नवीनीकृत ब्लास्ट फर्नेस-3 में अपनी कोल मिलिंग सुविधा न होने की चुनौती को दूर करने के लिए बीएसएल टीम ने लगभग 650 मीटर लंबी पाइपलाइन और 1.4 घन मीटर क्षमता के दो ब्लो टैंक स्थापित किए। इसके जरिए नाइट्रोजन गैस के उच्च वेग संतुलन के साथ बारीक कोयला सीधे फर्नेस तक पहुँचाया जा रहा है। 15 टन प्रति घंटा क्षमता वाली यह प्रणाली पूर्णतः पीएलसी आधारित ऑटोमेशन और दो-चरणीय नाइट्रोजन सुरक्षा प्रणाली से लैस है।

इस तकनीक के लागू होने से महंगे कोकिंग कोल की खपत में भारी कमी आएगी, जिससे संयंत्र को प्रति वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत होने का अनुमान है। इस पूरे जटिल प्रोजेक्ट को मात्र चार महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। यह कार्य निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन एवं अधिशासी निदेशक (संकार्य) अनुप कुमार दत्त के मार्गदर्शन तथा मुख्य महाप्रबंधक (उपयोगिताएं) के नेतृत्व में एसआईजीएस, जीयू, ईटीएल और सीआर-एम विभागों के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुआ।