– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
डेंगू व बाढ़ के बाद बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष तैयारी के निर्देश; एएनसी निबंधन, संस्थागत प्रसव, सी-सेक्शन, टीकाकरण और ओपीडी वेटिंग टाइम की हुई समीक्षा
पटना, 10 सितंबर 2026: सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, समुचित एवं त्वरित चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए हर स्तर पर प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। चिकित्सक मरीजों को पर्याप्त समय देकर उनकी समुचित जांच एवं उपचार करें तथा आवश्यक जांच सुविधाएं भी उचित तरीके से उपलब्ध कराई जाएं। ये बातें प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने गुरुवार को प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था की आयोजित समीक्षात्मक बैठक में कहीं।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सामान्यतः गरीब एवं जरूरतमंद लोग अधिक संख्या में आते हैं। इसलिए उनके प्रति विशेष संवेदनशीलता रखते हुए चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। उन्होंने सिविल सर्जन एवं संबंधित अधिकारियों को इस पर विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया।
डेंगू एवं बाढ़ के बाद बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष तैयारी
प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने डेंगू की रोकथाम एवं उपचार के लिए सभी जिलों में पर्याप्त तैयारी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने सिविल सर्जनों को नगर निकायों के माध्यम से नियमित रूप से फॉगिंग कराने तथा डेंगू के संभावित मामलों की निगरानी एवं उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने बाढ़ के बाद जलजनित एवं अन्य संक्रामक बीमारियों के संभावित प्रसार की रोकथाम के लिए भी आवश्यक तैयारियां रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय रहें और किसी भी संभावित बीमारी की स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।
गर्भवती महिलाओं का 100 प्रतिशत एएनसी निबंधन सुनिश्चित करने का निर्देश
बैठक में गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए एएनसी (Antenatal Care) निबंधन की समीक्षा की गई। समीक्षा में अप्रैल 2026 से अगस्त 2026 की अवधि में पटना जिले में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 122 प्रतिशत एएनसी निबंधन पाया गया, जबकि बक्सर में यह उपलब्धि 83 प्रतिशत रही।
प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने बक्सर एवं कम एएनसी निबंधन वाले अन्य जिलों, विशेषकर भोजपुर में विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत एएनसी निबंधन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को मोबिलाइज करते हुए उन्हें नियमित प्रसवपूर्व जांच के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक लाया जाए। इस कार्य में जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए, ताकि कोई भी गर्भवती महिला आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।
संस्थागत प्रसव एवं सी-सेक्शन डिलीवरी बढ़ाने पर जोर
प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने सभी सिविल सर्जनों को संस्थागत प्रसव में वृद्धि लाने का निर्देश दिया। सी-सेक्शन डिलीवरी की समीक्षा में बक्सर में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 16 प्रतिशत उपलब्धि पाई गई, जबकि पटना में 237 प्रतिशत उपलब्धि के साथ यह प्रमंडल में सर्वाधिक रही।
उन्होंने कहा कि जहां सर्जरी टीम अथवा विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, वहां आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों को हायर किया जाए, लेकिन मरीजों को समुचित एवं समय पर उपचार मिलना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने संबंधित सिविल सर्जनों को अपने क्षेत्र के नर्सिंग होम के चिकित्सकों के साथ बैठक करने तथा चिकित्सा उपचार में निर्धारित मानक प्रोटोकॉल (Standard Treatment Protocol) का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। परिवार नियोजन से संबंधित ऑपरेशन एवं सेवाओं पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
टीकाकरण की उपलब्धि में सुधार लाने का निर्देश
अप्रैल 2026 से अगस्त 2026 के दौरान हुए सम्पूर्ण टीकाकरण (Full Immunization) की समीक्षा में भोजपुर में 88 प्रतिशत, बक्सर में 103 प्रतिशत, कैमूर में 107 प्रतिशत, नालंदा में 110 प्रतिशत, पटना में 94 प्रतिशत तथा रोहतास में 104 प्रतिशत उपलब्धि रही।
प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी सिविल सर्जनों को टीकाकरण एवं पूर्ण प्रतिरक्षण के निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत प्राप्त करने की दिशा में विशेष प्रयास करने का निर्देश दिया।
ओपीडी में मरीजों का वेटिंग टाइम कम करने पर जोर
ओपीडी में मरीजों के औसत प्रतीक्षा समय की समीक्षा में भोजपुर में 36 मिनट, बक्सर में 32 मिनट, कैमूर में 35 मिनट, नालंदा में 33 मिनट, पटना में 37 मिनट तथा रोहतास में 36 मिनट पाया गया।
प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि चिकित्सकों को प्रेरित करें तथा ओपीडी की व्यवस्था को इस प्रकार सुदृढ़ करें कि मरीजों को कम से कम समय तक प्रतीक्षा करनी पड़े और उन्हें त्वरित चिकित्सा सेवा मिल सके। सिविल सर्जन ओपीडी का औचक निरीक्षण भी करें।
अस्पतालों में NQAS सर्टिफिकेशन पर विशेष ध्यान
उन्होंने सभी अस्पतालों में NQAS (National Quality Assurance Standards) सर्टिफिकेशन कराने की दिशा में विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। सभी सिविल सर्जनों एवं MOIC को अस्पतालों में आवश्यक मानकों को पूरा कराने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने को कहा गया।
प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी जिला पदाधिकारियों को भी स्वास्थ्य विभाग की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान एएनसी निबंधन, संस्थागत प्रसव, सी-सेक्शन डिलीवरी, टीकाकरण, पूर्ण प्रतिरक्षण, ओपीडी वेटिंग टाइम सहित सभी प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा कम उपलब्धि वाले क्षेत्रों में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।
बैठक में आयुक्त के सचिव विनय कुमार ठाकुर, सभी जिलों के सिविल सर्जन एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
