रेलवे की RAC नीति पर उठे सवाल: पूरा किराया लेकर आधी सीट देना कितना सही?

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–लाइव ख़बर नेशन || संतोष श्रीवास्तव

एक ही बर्थ पर दो मुसाफिर और दोहरा मुनाफा, क्या बदलेंगे भारतीय रेल के नियम?

नई दिल्ली, 03 अक्टूबर 2026: भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है, लेकिन टिकट आरक्षण की आरएसी (Reservation Against Cancellation) व्यवस्था अब यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। जब कोई यात्री स्लीपर या एसी क्लास का पूरा टिकट खरीदता है, तो उसमें रात को सोने और आराम से सफर करने की सुविधा भी शामिल होती है। इसके बावजूद आरएसी टिकट वाले दो अलग-अलग यात्रियों से पूरा किराया वसूल कर उन्हें एक ही साइड-लोअर बर्थ पर रातभर बैठकर सफर करने के लिए मजबूर किया जाता है। एक ही सीट से दो बार पूरा पैसा वसूलना रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

भारत जैसे बड़े देश में जहां ट्रेनों में सीटों की भारी कमी रहती है, वहां आरएसी सिस्टम पूरी तरह बंद करना व्यावहारिक नहीं है। यह व्यवस्था आपात स्थिति में कम से कम यात्रा करने की गारंटी देती है और वेटिंग लिस्ट के मुकाबले बेहतर विकल्प बनती है। विवाद इस सुविधा को लेकर नहीं, बल्कि आधी सुविधा के बदले पूरा किराया लेने को लेकर है। उपभोक्ता अधिकारों और व्यापारिक नियमों का सीधा नियम है कि जितनी सेवा दी जाए, उतना ही शुल्क लिया जाए।

जानकारों और यात्रियों की मांग है कि यदि किसी यात्री को पूरी यात्रा के दौरान कन्फर्म बर्थ नहीं मिलती और उसे आधी सीट पर ही सफर तय करना पड़ता है, तो यात्रा खत्म होते ही उसके किराए का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा अपने आप बैंक खाते में वापस आ जाना चाहिए। आज के डिजिटल दौर में ऐसा ऑटोमैटिक रिफंड सिस्टम लागू करना रेलवे के लिए बेहद आसान है। रेलवे का असली सुधार सिर्फ नई ट्रेनों और चमकते स्टेशनों से नहीं, बल्कि आम यात्रियों के प्रति संवेदनशील और निष्पक्ष नियम बनाने से ही संभव होगा।

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