रिश्वत मामले में राजस्व कर्मचारी दोषी करार

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Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

19 वर्ष पुराने निगरानी मामले में विशेष न्यायालय का फैसला, दो वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा

पटना, 30 जून 2026। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में विशेष न्यायालय निगरानी, भागलपुर ने राजस्व कर्मचारी अशोक पासवान को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज वर्ष 2007 के ट्रैप मामले में आया है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार विशेष न्यायालय निगरानी, भागलपुर के न्यायाधीश दीपक कुमार-1 ने निगरानी थाना कांड संख्या 85/2007 (विशेष वाद संख्या 27/2007) में अशोक पासवान, वर्तमान में राजस्व कर्मचारी, अंचल हवेली खड़गपुर, जिला मुंगेर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत दोषी ठहराया।

मामला परिवादी सीताराम मंडल की शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोप था कि तीन केवाला दाखिल-खारिज करने के एवज में राजस्व कर्मचारी ने 1,800 रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए 12 जुलाई 2007 को अशोक पासवान को 1,500 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

मामले की जांच तत्कालीन अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक उपेंद्र प्रसाद सिंह ने की थी। जांच पूरी होने के बाद समय पर आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों की गवाही कराई। बिहार सरकार की ओर से प्रभारी विशेष लोक अभियोजक रामबदन कुमार चौधरी ने प्रभावी पैरवी की।

न्यायालय ने धारा 7 के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी दो वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में एक माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के 10 मामलों में न्यायालय द्वारा दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।