परीक्षा तंत्र की शुचिता और युवाओं का भविष्य

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– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher

पेपर लीक पर लगाम के लिए तकनीक, पारदर्शिता और कठोर जवाबदेही का मजबूत तंत्र जरूरी

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की घटनाएं अब केवल प्रशासनिक चूक का विषय नहीं रह गई हैं। यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, उनकी मेहनत और पूरी परीक्षा व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुकी हैं।

एक अभ्यर्थी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में महीनों या वर्षों तक अपना समय, ऊर्जा और संसाधन लगाता है। उसके साथ उसका पूरा परिवार उम्मीदें जोड़ता है। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र लीक होने या किसी संगठित धांधली की खबर सामने आती है तो नुकसान केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे युवाओं का मनोबल टूटता है, परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और योग्यता तथा मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति तब पैदा होती है, जब किसी परीक्षा के संबंध में बार-बार विवाद सामने आएं। ऐसी घटनाएं प्रतिभाशाली युवाओं में यह धारणा पैदा कर सकती हैं कि मेहनत से अधिक प्रभावशाली है व्यवस्था में मौजूद कोई गलत रास्ता। किसी भी लोकतांत्रिक और युवा देश के लिए इससे बड़ी चिंता की बात नहीं हो सकती।

परीक्षा सुरक्षा को केवल कागजी व्यवस्था न बनाया जाए

परीक्षा तंत्र की सुरक्षा के लिए केवल प्रश्नपत्र के रखरखाव या परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। पूरी परीक्षा प्रक्रिया को प्रवेश से लेकर परिणाम और शिकायत निवारण तक सुरक्षित बनाना होगा।

सबसे पहले परीक्षा केंद्रों पर बहुस्तरीय पहचान सत्यापन लागू किया जाना चाहिए। फेशियल रिकग्निशन, फिंगरप्रिंट अथवा अन्य प्रमाणित बायोमेट्रिक प्रणालियों का इस्तेमाल परीक्षार्थी की पहचान सुनिश्चित करने में किया जा सकता है। इससे छद्म परीक्षार्थियों और पहचान संबंधी धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाने की आवश्यकता है। जहां ऑनलाइन परीक्षा संभव हो, वहां प्रश्नपत्र की छपाई, परिवहन और भौतिक भंडारण जैसी कमजोर कड़ियों को कम किया जा सकता है। परीक्षार्थी को व्यक्तिगत यूजर आईडी के साथ मजबूत प्रमाणीकरण के बाद ही परीक्षा प्रणाली तक पहुंच दी जानी चाहिए।

प्रश्नपत्र की सुरक्षा में तकनीक बने मजबूत कवच

प्रश्नपत्र सुरक्षा के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, सुरक्षित सर्वर, सीमित एक्सेस और डिजिटल लॉगिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। प्रश्नपत्र को परीक्षा से काफी पहले बड़ी संख्या में लोगों या केंद्रों तक पहुंचाने के बजाय आवश्यकता के अनुरूप नियंत्रित समय पर सुरक्षित डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था अधिक सुरक्षित हो सकती है।

प्रश्न बैंक आधारित क्रिप्टोग्राफिक रैंडमाइजेशन भी परीक्षा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है। परीक्षार्थियों को प्रश्नों का क्रम और विकल्प अलग-अलग क्रम में उपलब्ध कराने से बड़े पैमाने पर नकल या सामूहिक उत्तर-साझाकरण की संभावना कम की जा सकती है।

हालांकि यहां यह सावधानी भी जरूरी है कि केवल ‘AI’ को परीक्षा सुरक्षा का समाधान मान लेना उचित नहीं होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल प्रश्न चयन, असामान्य गतिविधियों की पहचान और सुरक्षा निगरानी में सहायक तकनीक के रूप में किया जा सकता है, लेकिन अंतिम नियंत्रण एक मजबूत मानव-निगरानी एवं ऑडिट व्यवस्था के अधीन होना चाहिए।

परीक्षा केंद्रों की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण

परीक्षा केंद्रों का चयन भी परीक्षा सुरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी है। निजी या कम-सुरक्षित केंद्रों की जगह प्रमाणित संस्थानों, विश्वविद्यालयों और निर्धारित मानकों वाले परीक्षा केंद्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हर केंद्र पर सीसीटीवी निगरानी, नियंत्रित प्रवेश-निकास, बिजली एवं इंटरनेट की वैकल्पिक व्यवस्था, सुरक्षित सर्वर कनेक्टिविटी और प्रशिक्षित पर्यवेक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।

AI-सक्षम वीडियो एनालिटिक्स संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में मदद कर सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल के साथ गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और मानव सत्यापन के स्पष्ट नियम भी आवश्यक हैं। तकनीक निगरानी का माध्यम बने, मनमानी का नहीं।

परिणाम और उत्तर-पत्रक में भी पारदर्शिता

परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थी को अपने प्रदर्शन से संबंधित पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

जहां संभव हो, उम्मीदवार को डिजिटल उत्तर-पत्रक, उसके द्वारा दिए गए उत्तर, आधिकारिक उत्तर कुंजी और निर्धारित समयसीमा में आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा दी जानी चाहिए। इससे परिणाम प्रक्रिया पर अनावश्यक संदेह की गुंजाइश कम होगी।

परिणाम जारी करने की प्रक्रिया में प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में स्वतंत्र ऑडिट किया जा सके।

ब्लॉकचेन से अधिक जरूरी है सुरक्षित डिजिटल ऑडिट

परीक्षा प्रणाली में ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का उपयोग कुछ विशेष परिस्थितियों में डेटा की अखंडता और रिकॉर्ड की ट्रेसबिलिटी बढ़ाने में सहायक हो सकता है। लेकिन किसी भी तकनीक को जादुई समाधान मानना उचित नहीं होगा।

वास्तविक सुरक्षा के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन, एक्सेस कंट्रोल, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, डिजिटल लॉग, नियमित सुरक्षा ऑडिट और स्वतंत्र साइबर सुरक्षा परीक्षण का समग्र ढांचा आवश्यक है।

अर्थात परीक्षा की सुरक्षा किसी एक तकनीक से नहीं, बल्कि तकनीक + प्रक्रिया + मानव निगरानी + जवाबदेही के संयुक्त मॉडल से सुनिश्चित होगी।

पेपर लीक पर कठोर और त्वरित कार्रवाई जरूरी

तकनीकी सुरक्षा के साथ कानूनी व्यवस्था को भी उतना ही प्रभावी बनाना होगा। प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

मामलों की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो और गंभीर परीक्षा अपराधों के लिए विशेष त्वरित न्यायिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है। कार्रवाई केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित न रहे; यदि किसी संगठित नेटवर्क, बिचौलिये या जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो पूरी श्रृंखला की जांच होनी चाहिए।

सचेतक को मिले सुरक्षा

परीक्षा संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों या परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों को यदि किसी अनियमितता की जानकारी मिलती है, तो उन्हें सुरक्षित तरीके से शिकायत करने का अवसर मिलना चाहिए।

एक स्वतंत्र और सुरक्षित व्हिसलब्लोअर पोर्टल बनाया जा सकता है, जहां शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखते हुए शिकायत की जांच हो। झूठी शिकायतों पर कार्रवाई के प्रावधान के साथ वास्तविक शिकायतकर्ताओं को प्रतिशोध से सुरक्षा देना भी आवश्यक है।

परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं, अंतिम विकल्प होना चाहिए

किसी परीक्षा में अनियमितता सामने आने पर पूरी परीक्षा रद्द करना कई बार आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसे सामान्य प्रक्रिया नहीं बनाया जा सकता। परीक्षा रद्द होने का सबसे बड़ा बोझ आखिरकार ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों पर पड़ता है।

इसलिए ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिसमें अनियमितता की पहचान जल्दी हो और प्रभावित हिस्से तक कार्रवाई सीमित रखने की तकनीकी क्षमता मौजूद हो। जहां पुनर्परीक्षा अपरिहार्य हो, वहां अभ्यर्थियों को समय, आर्थिक नुकसान और मानसिक दबाव को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट एवं शीघ्र निर्णय दिया जाना चाहिए।

युवाओं का विश्वास बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी

परीक्षा केवल प्रश्नों और उत्तरों का खेल नहीं है। यह उस सामाजिक विश्वास की परीक्षा भी है कि मेहनत, योग्यता और ईमानदारी का सम्मान होगा।

यदि किसी युवा को यह भरोसा नहीं रहेगा कि उसकी मेहनत का निष्पक्ष मूल्यांकन होगा, तो इसका प्रभाव केवल एक भर्ती परीक्षा पर नहीं पड़ेगा। यह शिक्षा व्यवस्था, रोजगार व्यवस्था और सामाजिक विश्वास-तीनों को प्रभावित करेगा।

इसलिए अब समय आ गया है कि परीक्षा सुरक्षा को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानने के बजाय राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा जाए। सुरक्षित डिजिटल तकनीक, मजबूत साइबर सुरक्षा, पारदर्शी प्रक्रियाएं, स्वतंत्र ऑडिट, प्रभावी निगरानी और कठोर जवाबदेही-इन सभी को एक साथ लागू करना होगा।

भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। उनके सपनों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता राष्ट्र के भविष्य के साथ समझौता है।