प्रेमचंद के कथा साहित्य में स्त्री चेतना पर दो दिवसीय संगोष्ठी संपन्न

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– चंदू प्रिन्स की रिपोर्ट

खगौल, 01 अगस्त। जगत नारायण लाल कॉलेज, खगौल के हिंदी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “प्रेमचंद के कथा साहित्य में स्त्री चेतना” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। संगोष्ठी में प्रेमचंद के साहित्य में नारी विमर्श, सामाजिक समानता और स्त्री चेतना के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।

समापन समारोह की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या प्रो. मधु प्रभा सिंह ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना अपने समय में था। उनकी रचनाओं में समाज में व्याप्त असमानताओं, सामाजिक विसंगतियों और स्त्री जीवन की चुनौतियों का यथार्थ चित्रण मिलता है, जो आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करता है।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि डॉ. नीतू चौहान ने प्रेमचंद की प्रमुख रचनाओं का उल्लेख करते हुए नारी की पीड़ा, संघर्ष और सामाजिक स्थिति का मार्मिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का समग्र विकास तभी संभव है, जब स्त्री और पुरुष को समान अवसर एवं समान अधिकार प्राप्त हों। प्रेमचंद का साहित्य इसी सामाजिक समानता का सशक्त संदेश देता है।

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संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। अलका कुमारी, स्वीटी कुमारी, नंदनी कुमारी, ईशा कुमारी, गुड़िया कुमारी, मनीता कुमारी, प्रिया गोस्वामी, राजवीर, मलैका मसूद एवं खुशबू कुमारी सहित अनेक प्रतिभागियों ने विषय पर अपने शोधपत्र एवं विचार प्रस्तुत किए। उत्कृष्ट पत्र वाचन करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया।

इस अवसर पर प्रो. निखिल कुमार सिंह, प्रो. अविनाश कुमार झा, प्रो. शशिकांत प्रसाद, डॉ. गिरिजेश नंदन कुमार, डॉ. जनार्दन प्रसाद तथा डॉ. सैयद सरवर इमाम सहित महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज ने किया, जबकि डॉ. अवंतिका कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और साहित्यिक विमर्श के माध्यम से प्रेमचंद के विचारों एवं स्त्री चेतना के विभिन्न पक्षों को समझने का अवसर प्राप्त किया।