विद्यालय में मनाई गई भारत छोड़ो प्रस्ताव की वर्षगांठ

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Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

छात्र-छात्राओं को भारत छोड़ो आंदोलन के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के महत्व से कराया गया अवगत

पटना, 14 जुलाई। छात्र-छात्राओं में देशभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से गुलजारबाग शैक्षणिक अंचल स्थित राजकीयकृत उर्दू मध्य विद्यालय, नरकट घाट, पटना में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित होने की 84वीं वर्षगांठ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के शिक्षक सूर्य कान्त गुप्ता के नेतृत्व में किया गया।

इस अवसर पर सूर्य कान्त गुप्ता ने कक्षा-8 की इतिहास की पाठ्यपुस्तक ‘हमारे अतीत-III’ के अध्याय ‘राष्ट्रीय आंदोलन का संगठन: 1870 के दशक से 1947 तक’ के अंतर्गत ‘भारत छोड़ो और उसके बाद’ विषय को विद्यार्थियों से जोड़ते हुए भारत छोड़ो आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि 14 जुलाई 1942 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक वर्धा में आयोजित हुई थी, जिसमें भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया गया। इसी बैठक में महात्मा गांधी को अहिंसक जन आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए अधिकृत किया गया। इसके बाद अगस्त 1942 में “करो या मरो” के आह्वान के साथ भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ हुआ, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक दिशा प्रदान की। उन्होंने यह भी बताया कि “भारत छोड़ो” का नारा समाजवादी ट्रेड यूनियन नेता युसूफ अली मेहर ने दिया था।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका प्रणया कुमारी ने भी भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि, उसके उद्देश्य तथा स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका पर विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाध्यापक एस. इब्तेशाम हुसैन काशिफ ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में देशभक्ति, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय में भविष्य में भी इस तरह के प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।