काठमांडू में गूंजी बज्जिका की आवाज, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शशि भूषण कुमार सम्मानित

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– एस०एन० चतुर्वेदी की रिपोर्ट

मातृभाषा के संरक्षण और बज्जिका के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए मिला सम्मान

हाजीपुर (वैशाली), 11 अगस्त : नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मेलन-2026 में बिहार के वरिष्ठ पत्रकार एवं बज्जिका भाषा के प्रबल समर्थक डॉ. शशि भूषण कुमार को सम्मानित किया गया। उन्हें लोकतंत्र की प्राचीन धरती वैशाली की मातृभाषा बज्जिका के संरक्षण, संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए किए गए कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

सम्मेलन का उद्घाटन नेपाल के कानून मंत्री ने किया। आयोजन में नेपाल, भारत, बांग्लादेश, भूटान और सऊदी अरब सहित विभिन्न देशों के पत्रकार, सांसद, जनप्रतिनिधि, भाषाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. शशि भूषण कुमार ने कहा कि बज्जिका केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि वैशाली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत की पहचान है। उन्होंने कहा कि बज्जिका को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाना उनका निरंतर मिशन है। मातृभाषा के माध्यम से किसी भी देश की संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोकतंत्र की धरती वैशाली से जुड़ी बज्जिका की आवाज को दुनिया के लोकतांत्रिक देशों तक पहुंचाना है। भाषाई एवं सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से आपसी भाईचारा, सद्भाव और विश्व शांति को मजबूत किया जा सकता है।

डॉ. कुमार ने वैशाली की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती भगवान महावीर की जन्मस्थली और भगवान बुद्ध की कर्मभूमि रही है। अहिंसा, शांति और मानवता का संदेश देने वाली इस विरासत को मातृभाषाओं और सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से विश्व समुदाय तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

सम्मेलन में भारत से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में अजीत कुमार, कृष्ण मोहन कुमार सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। वहीं, वीरगंज से पत्रकार शैलेश कुमार ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। आयोजन समिति की ओर से प्रतिनिधियों को ‘लव टोकन’ के रूप में सम्मान-स्मृति चिह्न भी प्रदान किया गया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर डॉ. शशि भूषण कुमार को मिला यह सम्मान बिहार की बज्जिका भाषा और वैशाली की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन में बज्जिका की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए उन्होंने मातृभाषा के जरिए सांस्कृतिक संवाद, भाईचारे और शांति का संदेश देने की प्रतिबद्धता दोहराई।