– अभिनव श्रीवास्तव की रिपोर्ट
सरकार के लिखित आश्वासन के बाद खत्म की भूख हड़ताल, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन जारी रहने के संकेत
नई दिल्ली, 24 जुलाई: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 27 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद शुक्रवार को समाप्त कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज नहीं करने, 20 जुलाई के मार्च में शामिल लोगों पर कार्रवाई नहीं करने तथा नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक आश्वासन दिया है। हालांकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर तत्काल कोई आश्वासन नहीं मिला है।
अनशन समाप्त करने की घोषणा करते हुए वांगचुक ने बताया कि देर रात केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह सहित सरकार के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सांसदों ने संसद में नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया, जबकि सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति दी गई।
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों और 20 जुलाई के मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों पर कोई मामला दर्ज नहीं करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा संसद में परीक्षा प्रणाली और शिक्षा सुधारों पर चर्चा तथा नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी सहमति जताई गई है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में फिलहाल कोई निश्चित आश्वासन नहीं दे सकी। उनके सामने दो विकल्प थे- अनिश्चितकाल तक अनशन जारी रखना या आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए स्वस्थ रहना। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी सेहत को प्राथमिकता देने की अपील की थी, इसलिए उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
वांगचुक ने कहा कि यदि भविष्य में इस्तीफे की मांग पूरी नहीं होती है तो इससे आंदोलनकारियों की नहीं बल्कि सरकार की राजनीतिक क्षति होगी। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना था कि आंदोलन में शामिल युवाओं पर कोई कानूनी कार्रवाई न हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।
उन्होंने लद्दाख का उदाहरण देते हुए कहा कि एफआईआर जैसी कानूनी प्रक्रियाएं युवाओं के भविष्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा नहीं चलाने का आश्वासन आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद में इस पूरे मामले पर गंभीर चर्चा होगी और जवाबदेही तय की जाएगी।
इस बीच आंदोलन से जुड़े संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सोनम वांगचुक ने भले ही अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी हो, लेकिन आंदोलन अभी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है और जब तक इस पर निर्णय नहीं होता, जंतर-मंतर पर धरना जारी रहेगा।
रांका ने कहा कि सरकार के साथ हुई वार्ता में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने जैसे मुद्दों पर सहमति बनी है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित निर्णयों का विस्तृत लिखित दस्तावेज सार्वजनिक होने की प्रतीक्षा है। साथ ही सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आगे भी बातचीत जारी रहेगी।

