सकरी-रैयाम में दो नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित होंगी

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Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

पटना | 23 फरवरी 2026

बिहार में औद्योगिक पुनर्जागरण की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। “समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार” संकल्प के तहत राज्य सरकार ने मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस दिशा में 23 फरवरी 2026 को सहकारिता विभाग, बिहार सरकार और राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड, नई दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह पहल बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और गन्ना उत्पादक किसानों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

समझौते की प्रमुख बातें

  • सकरी (जिला मधुबनी) और रैयाम (जिला दरभंगा) में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना
  • राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ द्वारा संभाव्यता प्रतिवेदन (Feasibility Report) तैयार किया जाएगा
  • स्वीकृति के बाद विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार होगा
  • परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी का चयन कर शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा
  • चीनी उत्पादन के साथ इथेनॉल, को-जनरेशन (बिजली उत्पादन) एवं उप-उत्पाद इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित

औद्योगिक ढांचे को मिलेगा विस्तार

सकरी स्थित बंद चीनी मिल परिसर में लगभग 30.848 एकड़ तथा रैयाम में 68.176 एकड़ भूमि उपलब्ध है। इन परिसरों को सहकारिता विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। प्रस्तावित गन्ना कॉम्पलेक्स में आधुनिक तकनीक आधारित इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी, जिससे उत्पादन क्षमता और राजस्व में वृद्धि होगी।

राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ की विशेषज्ञ टीम पटना पहुंच चुकी है और क्षेत्रीय अध्ययन के लिए सकरी एवं रैयाम का दौरा प्रारंभ कर दिया है। आगामी 7 से 8 दिनों तक तकनीकी सर्वेक्षण और संसाधन मूल्यांकन किया जाएगा।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

सहकारी मॉडल के तहत प्रत्येक मिल के कार्यक्षेत्र में गन्ना उत्पादक किसानों की सहकारी समिति गठित की जाएगी। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर स्थायी बाजार उपलब्ध होगा और गन्ने का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।

परियोजना से संभावित लाभ:

  • गन्ना किसानों को पारदर्शी भुगतान व्यवस्था
  • ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
  • स्थानीय स्तर पर पूंजी प्रवाह में वृद्धि
  • सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा
  • इथेनॉल उत्पादन से हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भविष्य की दिशा

बिहार का चीनी उद्योग एक समय देश में अग्रणी रहा है। दरभंगा और मधुबनी क्षेत्र विशेष रूप से गन्ना उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। लंबे समय से बंद पड़ी मिलों के कारण किसानों को बाजार संकट का सामना करना पड़ रहा था। नई सहकारी मिलों की स्थापना से न केवल औद्योगिक गतिविधियां पुनर्जीवित होंगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

सहकारिता विभाग के अनुसार, यह पहल राज्य सरकार की औद्योगिक प्रतिबद्धता को मूर्त रूप देने की दिशा में निर्णायक कदम है। विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

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