– अभिनव श्रीवास्तव : ब्यूरो प्रमुख
कड़े सुरक्षा इंतजाम और ट्रैफिक डायवर्जन बने परेशानी की वजह, 30 मिनट का सफर ढाई घंटे में हुआ पूरा
नई दिल्ली, 20 जुलाई। संसद के मानसून सत्र और सोमवार को आयोजित सीजेपी के संसद मार्च के मद्देनजर राजधानी दिल्ली में लागू किए गए व्यापक सुरक्षा इंतजामों का असर पूरे दिन यातायात व्यवस्था पर देखने को मिला। दिल्ली पुलिस द्वारा की गई बैरिकेडिंग, कई मार्गों पर डायवर्जन और सघन वाहन जांच के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लगा रहा। सामान्य दिनों में 30 मिनट में पूरा होने वाला सफर कई स्थानों पर दो से ढाई घंटे में पूरा हुआ।
यातायात जाम का सबसे अधिक असर दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल बसों में सफर कर रहे बच्चों, अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों तथा एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों पर पड़ा। सुबह से ही एनएच-44, एनएच-9, विकास मार्ग तथा दक्षिणी दिल्ली से लुटियंस दिल्ली की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने लगा। नोएडा, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले हजारों लोग घंटों जाम में फंसे रहे।
संसद भवन और अन्य संवेदनशील वीआईपी क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने कई प्रवेश मार्गों पर बैरिकेड लगाकर ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ा। हालांकि कुछ ही समय में वैकल्पिक मार्गों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया, जिससे वहां भी लंबा जाम लग गया।
सबसे अधिक प्रभावित मार्गों में तीन मूर्ति मार्ग, इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, कनॉट प्लेस, गोल डाकखाना रोड, पटेल चौक, राम मनोहर लोहिया अस्पताल मार्ग, तिलक मार्ग, बाराखंभा रोड, मंडी हाउस, खान मार्केट, रेल भवन, सुप्रीम कोर्ट रोड तथा हजरत निजामुद्दीन की ओर जाने वाले मार्ग शामिल रहे। नॉर्थ एवेन्यू और साउथ एवेन्यू रोड पर भी दिनभर रुक-रुककर यातायात चलता रहा।
यातायात की स्थिति इतनी तेजी से बदल रही थी कि गूगल मैप भी लोगों के लिए अधिक मददगार साबित नहीं हो सका। बड़ी संख्या में वाहन चालक वैकल्पिक मार्ग खोजते रहे, लेकिन लगातार बदल रहे ट्रैफिक डायवर्जन और बढ़ते दबाव के कारण एप पर सुझाए गए रास्ते भी कुछ ही देर में जाम की चपेट में आ गए। इससे कई लोग एक मार्ग से दूसरे मार्ग तक भटकते रहे।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, केवल नई दिल्ली क्षेत्र से ट्रैफिक कंट्रोल रूम में जाम से संबंधित 40 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए एक हजार से अधिक ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। कई संवेदनशील चौराहों और प्रमुख मार्गों पर उपायुक्त स्तर के अधिकारी स्वयं निगरानी करते हुए ट्रैफिक संचालन में जुटे रहे।
यातायात प्रतिबंधों का असर नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली स्थित सरकारी तथा निजी कार्यालयों पर भी पड़ा। एनडीएमसी के लगभग 13 हजार कर्मचारियों में से केवल करीब पांच हजार कर्मचारी ही समय पर कार्यालय पहुंच सके। कई कर्मचारियों को बसों से बीच रास्ते उतरकर दो-दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
एनडीएमसी के एक कर्मचारी ने बताया कि संगम विहार से आने के दौरान उनकी बस खान मार्केट के पास जाम में फंस गई, जिसके बाद उन्हें पैदल चलकर कार्यालय पहुंचना पड़ा और वे सुबह 11 बजे दफ्तर पहुंच सके। वहीं, एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर सुरक्षा कारणों से निकास बंद था, हालांकि पहचान पत्र दिखाने के बाद उन्हें बाहर निकलने की अनुमति मिली। एक निजी कंपनी के कर्मचारी ने बताया कि बाराखंभा रोड पर यातायात बंद होने के कारण उन्हें रामलीला मैदान के पास वाहन खड़ा कर पैदल कार्यालय जाना पड़ा।
पूरे दिन राजधानी के विभिन्न हिस्सों में यातायात सामान्य करने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार प्रयास करता रहा, लेकिन सुरक्षा प्रतिबंधों और भारी वाहन दबाव के कारण लोगों को व्यापक असुविधा का सामना करना पड़ा।
