– रंजीत प्रसाद सिन्हा : संवाददाता
जगत नारायण लाल की जयंती पर शिक्षाविदों ने न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर रखे विचार
खगौल/पटना, 21 जुलाई। जगत नारायण लाल कॉलेज, खगौल के राजनीति विज्ञान विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के संस्थापक एवं स्वतंत्रता सेनानी जगत नारायण लाल की जयंती के अवसर पर “लोकतंत्र में न्याय की अवधारणा” विषय पर द्वि-दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत जगत नारायण लाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। वक्ताओं ने उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और भारतीय संविधान निर्माण समिति के सदस्य के रूप में निभाई गई भूमिका को स्मरण किया। छात्राओं ईशा और नंदिनी ने मंगलगान प्रस्तुत किया, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन के साथ संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्रधानाचार्या मधुप्रभा सिंह ने की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्या ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता न्याय और सामाजिक मूल्यों की मजबूती पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि जब समाज अपने मूल्यों और कर्तव्यों से विमुख होता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था भी कमजोर पड़ जाती है।
मुख्य अतिथि प्रो. दिलीप कुमार ने न्याय की स्थापना के लिए समाज में सहिष्णुता को आवश्यक बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. अरविन्द कुमार ने लोकतंत्र में न्याय की अवधारणा पर विस्तृत व्याख्यान दिया। आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. निखिल कुमार सिंह ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए न्यायपालिका का सशक्त और स्वतंत्र होना अनिवार्य है।
कार्यक्रम में प्रो. अविनाश कुमार ने लोकतंत्र में सामूहिक न्याय और सामाजिक समरसता पर बल दिया। डॉ. शशिकान्त प्रसाद ने लोकतंत्र की रक्षा में नागरिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, जबकि डॉ. गिरिजेश नंदन कुमार ने सामाजिक असमानता के मुद्दे पर अपने विचार रखे। डॉ. सैयद सरवर ईमाम ने सामाजिक न्याय से संबंधित महत्वपूर्ण साहित्य और पुस्तकों की जानकारी साझा की।
संगोष्ठी में विद्यार्थियों की भी सक्रिय भागीदारी रही। आदित्य आनंद, स्वाति कुमारी, सुप्रिया कुमारी, राजीव कुमार, धीरज कुमार, काजल कुमारी, मुदासिर रजा, अंकेशा कुमारी, मोनिका कुमारी और प्रभात कुमार सहित कई छात्र-छात्राओं ने लोकतंत्र, न्याय और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पल्लवी ने किया, जबकि सह-समन्वयक डॉ. पंकज ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

