– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher
नि:शुल्क शिक्षा से गरीब बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल, स्थापना दिवस पर बच्चों को पठन सामग्री और भोजन वितरित
बोकारो, 9 अगस्त। जन कल्याण सामाजिक संस्था द्वारा संचालित बिरसा मुंडा नि:शुल्क विद्यालय का 32वां स्थापना दिवस समारोह उत्साह और गरिमा के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों को सराहा गया। समारोह के मुख्य अतिथि अक्षय कुमार ने कहा कि गरीब और लाचार बच्चों को शिक्षा देना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य आसान नहीं है। ऐसे प्रयास के लिए निष्ठा, समर्पण और निरंतर मेहनत की आवश्यकता होती है।
1997 से जारी है नि:शुल्क शिक्षा की पहल
बिरसा मुंडा नि:शुल्क विद्यालय की स्थापना वर्ष 1997 में बोकारो के सेक्टर-12 स्थित झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में की गई थी। विद्यालय का संचालन समाजसेवी परशुराम राम द्वारा किया जा रहा है।
विद्यालय के संस्थापक सह सचिव परशुराम राम ने बताया कि आसपास की बस्तियों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को यहां नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यालय का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।
ड्रेस और पठन सामग्री भी नि:शुल्क
विद्यालय की ओर से समय-समय पर बच्चों को नि:शुल्क ड्रेस, कॉपियां और लेखन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। संस्था के अनुसार इस कार्य में क्षेत्र के समाजसेवियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का लगातार सहयोग मिलता रहा है।
स्थापना दिवस समारोह के दौरान बोकारो क्लब के विक्रम और नरेश की ओर से बच्चों एवं अभिभावकों के बीच भोजन का वितरण किया गया। वहीं योगेंद्र प्रसाद कुशवाहा और परशुराम सिंह ने बच्चों को कॉपी, पेंसिल सहित अन्य पठन सामग्री प्रदान की।
सामाजिक सहयोग से आगे बढ़ रहा विद्यालय
समारोह में संस्था के सचिव परशुराम राम, अखिलेश्वर पांडेय, अक्षय कुमार, योगेंद्र प्रसाद कुशवाहा, वेद प्रेम सिंह, हरिशंकर प्रसाद सोनी, विजय कुमार, ममता सिंह, बबीता कुमारी और अजय कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
स्थापना दिवस के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से वंचित बच्चों को पढ़ाई का अवसर उपलब्ध कराना समाज की साझा जिम्मेदारी है। ऐसे प्रयास बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ाते हैं।

