220 केवी ट्रांसमिशन लाइन का लोकार्पण

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Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

मोनो पोल तकनीक से बोकारो इस्पात संयंत्र की ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत, निर्बाध बिजली आपूर्ति से उत्पादन क्षमता को मिलेगा नया बल

बोकारो, 21 जुलाई। बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) और दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने औद्योगिक अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तृतीय 220 केवी सीटीपीएस-एमआरएस ट्रांसमिशन लाइन का लोकार्पण किया। आधुनिक मोनो पोल तकनीक पर आधारित इस परियोजना के शुरू होने से संयंत्र को अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे उत्पादन क्षमता और परिचालन दक्षता में वृद्धि की उम्मीद है।

डीएनडब्ल्यू के मेन रिसीविंग सब-स्टेशन (एमआरएस) परिसर में आयोजित समारोह में बोकारो इस्पात संयंत्र के निदेशक-प्रभारी प्रिय रंजन तथा डीवीसी के मेंबर (तकनीकी) ने संयुक्त रूप से ट्रांसमिशन लाइन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता एवं परियोजना से जुड़े कर्मचारी मौजूद रहे।

करीब 8.6 किलोमीटर लंबी यह 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन चंद्रपुरा ताप विद्युत स्टेशन (सीटीपीएस) से बोकारो इस्पात संयंत्र के मेन रिसीविंग सब-स्टेशन तक स्थापित की गई है। परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसमें पारंपरिक लैटिस टावरों के स्थान पर 29 अत्याधुनिक मोनो पोल का उपयोग है। डीवीसी के इतिहास में पहली बार अपनाई गई इस तकनीक से कम भूमि में निर्माण संभव हुआ है, साथ ही परियोजना को कम समय में बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा किया गया।

परियोजना को 10 जुलाई को तकनीकी रूप से चार्ज किए जाने के बाद आवश्यक परीक्षण और निरीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। सभी मानकों पर खरा उतरने के उपरांत 21 जुलाई को इसे औपचारिक रूप से चालू कर दिया गया।

नई ट्रांसमिशन लाइन के संचालन से बोकारो इस्पात संयंत्र की विभिन्न उत्पादन इकाइयों को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। इससे पावर ट्रिपिंग और वोल्टेज फ्लक्चुएशन जैसी समस्याओं में कमी आएगी तथा संयंत्र की उत्पादन क्षमता और परिचालन दक्षता को मजबूती मिलेगी।

समारोह को संबोधित करते हुए निदेशक-प्रभारी प्रिय रंजन ने कहा कि किसी भी एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिए विश्वसनीय विद्युत अवसंरचना उसकी आधारशिला होती है। यह परियोजना सुरक्षित, सतत और कुशल इस्पात उत्पादन को नई मजबूती प्रदान करेगी। वहीं डीवीसी के मेंबर (तकनीकी) ने बीएसएल और डीवीसी के बीच समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्ता, सुरक्षा और समयबद्धता के साथ पूरी की गई यह परियोजना दोनों संस्थानों के तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह ट्रांसमिशन लाइन भविष्य में बीएसएल की ऊर्जा सुरक्षा और उत्पादन लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।