12 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार, ठेका कंपनी में नौकरी मिलने पर समाप्त हुआ अनशन

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– Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

बीएसएल कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मौत के बाद आश्रित को प्लांट में नौकरी की मांग पर चला आंदोलन, प्रशासन की पहल से बना समाधान

बोकारो, 28 जुलाई 2026। बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के कर्मचारी सुभाष चंद्र मोदी की ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटना के बाद इलाज के क्रम में हुई मौत के मामले में 12 दिनों तक चला आंदोलन मंगलवार को समाप्त हो गया। मृतक की पत्नी सोनमणि देवी ने अपने आश्रित को बीएसएल में नियोजन की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया था। प्रशासन की पहल और बीएसएल प्रबंधन के साथ हुई वार्ता के बाद मृतक के दूसरे पुत्र को प्लांट परिसर में कार्यरत एक ठेका कंपनी में स्किल्ड लेबर के रूप में नियोजन दिए जाने पर अनशन समाप्त हुआ। इसके बाद 12 दिनों से शवगृह में रखे सुभाष चंद्र मोदी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।

जानकारी के अनुसार, बीएसएल के एसएमएस एवं सीसीएस विभाग में कार्यरत सुभाष चंद्र मोदी (स्टाफ संख्या-763509) की ड्यूटी के दौरान दुर्घटना हुई थी। इलाज के क्रम में 17 जुलाई 2026 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद परिजनों ने मृतक के आश्रित को बीएसएल में अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया।

आंदोलन को भारतीय जनता पार्टी और आजसू पार्टी के नेताओं का समर्थन मिला। इस दौरान गोमिया के पूर्व विधायक लम्बोदर महतो, धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो सहित कई जनप्रतिनिधियों ने परिजनों से मुलाकात कर बीएसएल में नियोजन की मांग का समर्थन किया।

मृतक की पत्नी सोनमणि देवी ने बीएसएल प्रशासनिक भवन के सामने स्थित टू-टेन गार्डन में आमरण अनशन शुरू किया। चास की अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) प्रांजल ढांडा ने उन्हें समझाकर अनशन समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसएल में नियोजन के आश्वासन के बिना न तो अनशन समाप्त करेंगी और न ही शव का अंतिम संस्कार करेंगी।

मंगलवार देर शाम बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने सभी पक्षों के साथ वार्ता की। प्रशासन की मध्यस्थता के बाद बीएसएल प्रबंधन ने प्लांट परिसर में कार्यरत ठेका कंपनी हाईटेक इंटरप्राइजेज में मृतक के दूसरे पुत्र को स्किल्ड लेबर के पद पर नियोजन उपलब्ध कराया। इसके बाद उपायुक्त ने जूस पिलाकर सोनमणि देवी का अनशन समाप्त कराया।

बीएसएल प्रबंधन का कहना है कि ठेका कंपनी में रोजगार का प्रस्ताव पहले दिन से ही उपलब्ध था, लेकिन परिजनों की मांग सीधे बीएसएल में स्थायी नियोजन की थी, जो वर्तमान सरकारी नियमों के तहत संभव नहीं था।

प्रबंधन के अनुसार, मृतक सुभाष चंद्र मोदी का एक पुत्र रोहित कुमार पहले से ही बीएसएल में कार्यरत है। वर्ष 2022 में भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (DPE) द्वारा जारी नीति के अनुसार, यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा या पात्र श्रेणी की सेवा में कार्यरत है, तो अनुकंपा के आधार पर दूसरे आश्रित को सरकारी उपक्रम में नौकरी प्रदान नहीं की जा सकती। इसी कारण बीएसएल प्रबंधन ने प्लांट में अनुकंपा नियुक्ति देने में असमर्थता जताई।

हालांकि, परिजनों को राहत देने के उद्देश्य से बीएसएल परिसर में कार्यरत ठेका कंपनी में रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हो गया।