बाल तस्करी के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान शुरू, डेढ़ लाख गांव होंगे चाइल्ड ट्रैफिकिंग मुक्त

Live ख़बर

– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का लक्ष्य एक वर्ष में एक लाख बच्चों का बचाव, 782 जिलों में चलेगा देशव्यापी अभियान

नई दिल्ली, 31 जुलाई। बच्चों के अधिकारों के लिए कार्यरत देश के सबसे बड़े नागरिक समाज नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने नई दिल्ली में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श “Ensuring Child Rights, Potential and Prosperity” के दौरान ‘नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ का शुभारंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य देशभर में बाल तस्करी की रोकथाम, पीड़ित बच्चों का बचाव, पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है।

जेआरसी ने घोषणा की कि अभियान के तहत अगले एक वर्ष में देश के 1.5 लाख गांवों को चाइल्ड ट्रैफिकिंग मुक्त बनाने तथा एक लाख तस्करी के शिकार बच्चों को मुक्त कराकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान देश के 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 782 जिलों में जेआरसी के 250 से अधिक सहयोगी संगठनों के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

जेआरसी जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बाल कल्याण समितियों तथा पंचायती राज संस्थाओं के सहयोग से बाल तस्करी के शिकार बच्चों की पहचान, बचाव, पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने का कार्य करेगा। अभियान के दौरान मानव तस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को भी प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही प्रत्येक पीड़ित बच्चे को न्याय दिलाने के लिए कानूनी हस्तक्षेप को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि देश में प्रतिदिन औसतन 6 बच्चों की तस्करी होती है, जबकि 5 बच्चों को जबरन मजदूरी के लिए मजबूर किया जाता है। इसके अलावा हर घंटे 11 बच्चे लापता हो जाते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या मानव तस्करी का शिकार होती है। वैश्विक स्तर पर मानव तस्करी को हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी के बाद तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध माना जाता है, जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

अभियान के अंतर्गत ग्राम सभाओं, पंचायतों और स्कूलों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। पोस्टर, बैनर, जनसंवाद और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के जरिए परिवारों और समुदायों को बाल तस्करी के बदलते स्वरूप, कानूनी अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से संवेदनशील एवं सीमावर्ती जिलों पर फोकस करते हुए समुदायों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर समय पर सूचना देने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

Follow this link to JOIN our WhatsApp Community

इसके अलावा वंचित एवं जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान कर उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों तथा विद्यालयों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे तस्करी के खतरे से सुरक्षित रह सकें और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हों।

जेआरसी के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि भारत की संसद ने मानव तस्करी के विरुद्ध दुनिया के सबसे सख्त कानूनों में से एक बनाकर अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की है। समय पर शिकायत दर्ज करने, त्वरित बचाव, प्रभावी जांच, कठोर कार्रवाई और समन्वित पुनर्वास के माध्यम से वर्ष 2030 तक बाल तस्करी जैसे संगठित अपराध को समाप्त करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।