– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
काठमांडू में तीसरे अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मेलन में बज्जिका भाषा और वैशाली की लोकतांत्रिक विरासत पर देंगे व्याख्यान
हाजीपुर (वैशाली), 07 अगस्त। नेपाल की राजधानी काठमांडू में 9 से 12 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले तीसरे अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मेलन-2026 में बिहार के वरिष्ठ पत्रकार, मानवाधिकार टुडे के संपादक एवं मातृभाषा संरक्षण अभियान से जुड़े शशि भूषण कुमार भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। सम्मेलन में वे वैशाली की मातृभाषा बज्जिका में व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। उनके साथ अजीत कुमार पांडेय, संतोष कुमार एवं कृष्ण मोहन कुमार भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
यह लगातार तीसरा अवसर होगा जब शशि भूषण कुमार अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मेलन में बज्जिका भाषा का प्रतिनिधित्व करेंगे। इससे पहले 2024 और 2025 में भी उन्होंने काठमांडू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में बज्जिका भाषा, वैशाली की लोकतांत्रिक परंपरा, भारतीय लोकसंस्कृति तथा मातृभाषाओं के संरक्षण से जुड़े विषयों पर व्याख्यान दिए थे।
उनके अनुसार, वैशाली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना केवल क्षेत्रीय पहचान का विषय नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध भाषाई विविधता को वैश्विक स्तर पर सामने रखने का प्रयास है। सम्मेलन में वे बज्जिका के इतिहास, साहित्य, पत्रकारिता एवं लोकसंस्कृति के साथ वैशाली की लोकतांत्रिक विरासत पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
शशि भूषण कुमार को मातृभाषा पत्रकारिता और भाषाई संरक्षण के क्षेत्र में योगदान के लिए वर्ष 2025 में “धर्मादित्य धर्माचार्य अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मान-2025” प्रदान किया गया था। यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे प्रथम भारतीय बने थे।
शशि भूषण कुमार का कहना है कि वैशाली की ऐतिहासिक भूमि ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की महत्वपूर्ण विरासत दुनिया को दी है और इसी धरती की लोकचेतना, संस्कृति तथा सामाजिक जीवन से विकसित बज्जिका केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृति की अभिव्यक्ति भी है।
उन्होंने कहा, “भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। मातृभाषा का संरक्षण केवल शब्दों का संरक्षण नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, परंपरा और सभ्यता की निरंतरता को सुरक्षित रखने का अभियान है।”
काठमांडू सम्मेलन में वे मातृभाषा पत्रकारिता के समक्ष मौजूद चुनौतियों, भाषाई संरक्षण तथा वैश्विक स्तर पर मातृभाषाओं की भूमिका पर भी अपने विचार रखेंगे। उनका व्याख्यान भारतीय भाषाई विविधता और सांस्कृतिक अस्मिता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करने का माध्यम बनेगा।
भाषा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर बज्जिका की प्रभावी उपस्थिति वैशाली और बिहार के साथ-साथ भारत की मातृभाषाओं के सम्मान, संरक्षण और वैश्विक पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सम्मेलन को मातृभाषा आधारित पत्रकारिता, सांस्कृतिक संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय भाषाई संवाद को नई दिशा देने वाले मंच के रूप में देखा जा रहा है।

