– रंजीत प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट
जन कन्वेंशन में पुरानी पेंशन बहाली, 8वें वेतन आयोग, रिक्त पदों पर भर्ती और सुरक्षा सुविधाओं की मांग
पटना, 9 अगस्त। अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन (ईसीआरईयू) एवं इंडियन रेलवे एम्प्लाइज फेडरेशन के आह्वान पर रविवार को दानापुर मंडल के पटना जंक्शन, दानापुर स्टेशन सहित विभिन्न शाखाओं में विशाल जन कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्वेंशन में रेल कर्मचारियों से जुड़े वेतन, पेंशन, पदोन्नति, स्थानांतरण, कार्य समय, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सेवा शर्तों समेत 46 मांगों पर चर्चा हुई। संगठन ने रेलवे प्रशासन एवं संबंधित उच्चाधिकारियों से समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
पुरानी पेंशन और 8वें वेतन आयोग की मांग
कन्वेंशन में एनपीएस एवं यूपीएस समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, सातवें वेतन आयोग के आधार पर उत्पादकता आधारित पीएलबी बोनस का एरियर सहित भुगतान करने तथा आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट अविलंब लागू करने की मांग प्रमुख रही। कर्मचारियों ने वेतन निर्धारण के लिए 3.5 के फिटमेंट फैक्टर की मांग भी रखी।
संगठन ने श्रम कानूनों से संबंधित चारों कानूनों को निरस्त कर पुराने श्रम कानून लागू करने की मांग की। साथ ही रेलवे में रिक्त पदों को भर्ती एवं पदोन्नति के माध्यम से शीघ्र भरने, प्रतिवर्ष दो प्रतिशत पदों को सरेंडर करने के आदेश पर रोक लगाने तथा आउटसोर्सिंग के बजाय नियमित बहाली की मांग की गई। ठेका मजदूरों के लिए समान काम के बदले समान वेतन लागू करने की मांग भी उठी।
ट्रैक मेंटेनरों की समस्याओं पर जोर
इंजीनियरिंग विभाग के ट्रैक मेंटेनर कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी कन्वेंशन में प्रमुखता से उठाए गए। रेलवे बोर्ड की रिपोर्ट लागू करने, ट्रैक मेंटेनरों के लिए उच्च ग्रेड का पद सृजित कर पदोन्नति देने तथा ट्रैक निरीक्षण के दौरान की-मैन के साथ सहयोगी निगरानीकर्ता उपलब्ध कराने की मांग की गई।
कर्मचारियों ने लेवल-5 से नीचे के कर्मचारियों से की-मैन एवं मेट का कार्य नहीं लेने तथा 14/2 से संबंधित प्रावधान समाप्त करने एवं 55/30 के सर्विस रिव्यू पर रोक लगाने की मांग की।
ट्रैफिक प्वाइंट्समैन, गेटमैन, सिग्नल एवं टेलीकॉम, टीआरडी, सीएंडडब्ल्यू सहित विभिन्न विभागों में आठ घंटे की ड्यूटी रोस्टर व्यवस्था लागू करने की मांग भी सामने आई। सिग्नल एवं टेलीकॉम विभाग में अनुमोदित आठ घंटे के ड्यूटी रोस्टर, नाइट फेलियर गैंग तथा नए यार्ड स्टिक के आधार पर अनुरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई।
रेल सुरक्षा को लेकर कई मांगें
कर्मचारियों ने सभी समपार फाटकों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, सेफ्टी कैटेगरी के कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने और ट्रैक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की।
रेलवे बोर्ड के निर्देश के अनुसार ओपन लाइन कर्मचारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेफ्टी शूज, विंटर जैकेट, रेनकोट और वाटर बोतल उपलब्ध कराने की मांग की गई। रन-ओवर हादसों की उच्चस्तरीय जांच तथा सभी रेल कर्मचारियों का एक करोड़ रुपये का बीमा कराने की मांग भी कन्वेंशन में उठी।
भत्तों और डीए एरियर के भुगतान की मांग
कर्मचारियों ने टीए, एनडीए, ओटी, सीटीए, शिक्षण शुल्क भत्ता, वर्दी भत्ता आदि का समय पर वेतन के साथ भुगतान करने की मांग की। साथ ही एक जनवरी 2020 से 31 जून 2021 तक के 18 माह के डीए एरियर तथा साइकिल भत्ता के लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग की गई।
रनिंग कर्मचारियों के ड्यूटी आवर कम करने, आरएसी-1980 के फार्मूले के अनुसार रनिंग भत्ता देने तथा रनिंग भत्ते को आयकर से मुक्त करने की मांग भी रखी गई।
पदोन्नति और स्थानांतरण में पारदर्शिता की मांग
कन्वेंशन में एलडीसीई एवं जीडीसीई परीक्षाएं प्रत्येक वर्ष आयोजित करने, सभी विभागों के कर्मचारियों को प्रत्येक पांच वर्ष पर एमएसीपी का लाभ देने तथा वर्ष की शुरुआत में कैटेगरीवार पदोन्नति परीक्षा का कैलेंडर जारी करने की मांग की गई।
प्रशिक्षण कैलेंडर और स्थानांतरण प्राथमिकता सूची समय से जारी करने पर भी जोर दिया गया। संगठन ने स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता लाने, प्राथमिकता सूची एवं नेम नोटिंग के आधार पर स्थानांतरण करने तथा लंबित स्थानांतरण आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने की मांग की।
ईसीआरईयू ने आरोप लगाया कि अनावश्यक स्थानांतरण, चार्जशीट, निलंबन, रिमूवल, छुट्टी, पदोन्नति, एरियर-भत्ता अथवा वेतन रोकने जैसी कार्रवाइयों से कर्मचारियों को मानसिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। संगठन ने ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
स्वास्थ्य और कर्मचारी कल्याण पर भी जोर
कर्मचारियों ने रेलवे के अनुबंधित अस्पतालों में यूएमआईडी कार्ड के आधार पर बिना रेफरल कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। रक्सौल एवं सीतामढ़ी में रेलवे चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की मांग भी रखी गई।
बड़े अस्पतालों, शहरों एवं पर्यटन स्थलों के निकट रेलवे हॉलिडे होम तथा सभी जंक्शन और बड़े स्टेशनों पर कर्मचारी विश्रामालय बनाने की मांग की गई। सभी कर्मचारियों के लिए रेलवे आवास, गैंग हट, टूल कक्ष-सह-विश्राम कक्ष उपलब्ध कराने तथा रेलवे आवास, अस्पताल, बिजली और पानी जैसी स्थानीय समस्याओं का निरीक्षण कर शीघ्र समाधान करने की मांग भी उठाई गई।
इसके अलावा टीटीई ट्रांजिट रूम, सिग्नल मेंटेनर रूम, टेलीकॉम मेंटेनर रूम और रनिंग स्टाफ रेस्ट रूम की व्यवस्था करने की मांग की गई।
महिला कर्मचारियों के लिए सुविधाओं की मांग
महिला रेल कर्मचारियों के लिए प्रत्येक माह नेचुरल लीव तथा कार्यस्थल पर अलग शौचालय, वाशरूम और कॉमन रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई। जंक्शन एवं बड़े स्टेशनों पर प्रत्येक छह माह में यूएमआईडी कार्ड, एचआरएमएस पास, पहचान पत्र, सर्विस बुक सुधार, पेंशन एवं अनुकंपा अदालत से संबंधित शिविर आयोजित करने की मांग भी रखी गई।
कन्वेंशन में लार्जेस्ट स्कीम को पुनः लागू करने तथा पेट्रोलमैन का बीट सिंगल लाइन में दो किलोमीटर और डबल लाइन में एक किलोमीटर निर्धारित करने की मांग भी सामने आई।
ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन ने कहा कि जन कन्वेंशन में उठाए गए मुद्दे रेल कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों, सेवा सुरक्षा, वेतन-भत्तों, पदोन्नति, स्वास्थ्य सुविधाओं और कार्यस्थल की सुरक्षा से सीधे जुड़े हैं। संगठन ने रेलवे प्रशासन से अपने स्तर पर समाधान योग्य मामलों का शीघ्र निपटारा करने तथा उच्चस्तरीय मामलों को संबंधित सक्षम प्राधिकार के समक्ष भेजने का आग्रह किया।

