– रंजीत प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट
“बोल-बम के रंग में यात्री हुए बेरंग” के जरिए धार्मिक आस्था और रेल यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का संदेश
फुलवारी शरीफ। सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच की ओर से आयोजित साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक श्रृंखला के तहत वाल्मी, फुलवारी शरीफ में “बोल-बम के रंग में यात्री हुए बेरंग” नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से सावन और कांवर यात्रा के दौरान रेल यात्रियों को होने वाली परेशानियों को सामने रखते हुए धार्मिक आस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया।
नाटक का लेखन महेश चौधरी ने किया, जबकि निर्देशन मिथिलेश कुमार पांडे ने किया। प्रस्तुति की शुरुआत अमन कुमार के स्वरबद्ध गीत “कांवरिया बम के रंग में रंगा है पूरा धाम, जाने-आने के जोश में बम जी भूल गए औरों का ध्यान…” से हुई।
आरक्षित सीटों पर कब्जे से यात्रियों की परेशानी
नाटक में सावन और कांवर यात्रा के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ तथा आरक्षित सीटों पर जबरन कब्जा किए जाने से आम यात्रियों को होने वाली परेशानियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कलाकारों ने अभिनय के माध्यम से दिखाया कि कई बार कांवरिया यात्रियों के समूह आरक्षित सीटों पर बैठ जाते हैं। वहीं, लगातार लगने वाले बोल-बम के जयकारों और अत्यधिक भीड़ के कारण सामान्य यात्रियों के लिए ट्रेन में चढ़ना-उतरना, अपनी आरक्षित सीट तक पहुंचना और यहां तक कि शौचालय तक जाना भी मुश्किल हो जाता है।
नाटक में कलाकारों ने इस स्थिति को सामाजिक सरोकार के मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को सोचने का संदेश दिया।
आस्था के साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान जरूरी
कलाकारों ने संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और कांवर यात्रा के प्रति सम्मान आवश्यक है, लेकिन आस्था के नाम पर किसी दूसरे यात्री को उसकी आरक्षित सीट से वंचित करना या उसे असुविधा में डालना उचित नहीं है।
नाटक के माध्यम से यह भी बताया गया कि कांवर यात्रा से लेकर मंदिर में जलाभिषेक तक श्रद्धालुओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनकी धार्मिक गतिविधियों से किसी अन्य व्यक्ति को परेशानी या नुकसान न हो। दूसरों की सुविधा, अधिकार और सम्मान का ध्यान रखना ही आस्था को सार्थक बनाता है।
कलाकारों ने प्रभावी प्रस्तुति से जीता दर्शकों का ध्यान
नाटक में अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने वाले कलाकारों में महेश चौधरी, मिथिलेश कुमार पांडे, कामेश्वर प्रसाद, सौरभ, अमन, प्रतीक कुमार, मुन्ना यादव, आद्विक और देव दर्शन शामिल रहे।
प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने अभिनय, संवाद और गीत के माध्यम से कांवर यात्रा के दौरान रेल यात्रियों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों के सामने रखा। नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक जागरूकता का संदेश देने की पहल की दर्शकों ने सराहना की।

