– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher
आदिवासी दर्शन, सह-अस्तित्व और प्रकृति संरक्षण पर परिचर्चा; पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प के स्टॉल बने आकर्षण
बोकारो, 9 अगस्त। बोकारो आदिवासी महोत्सव-2026 में आदिवासी संस्कृति और परंपरा के विविध रंग देखने को मिले। आदिवासी फैशन शो, सोहराय पेंटिंग, पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और बौद्धिक परिचर्चा ने आयोजन को विशेष बना दिया। दिनभर चले कार्यक्रमों में संस्कृति, कला, प्रकृति संरक्षण और आदिवासी जीवन-दर्शन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
आदिवासी दर्शन और सह-अस्तित्व पर गंभीर विमर्श
महोत्सव के दौरान आयोजित बौद्धिक सत्र में सेवानिवृत्त आईएएस एवं लेखक रणेंद्र कुमार, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रो. रामचंद्र उरांव और सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्रो. संतोष किरो ने ‘आदिवासी दर्शन और सह-अस्तित्व’ विषय पर विचार रखे।
वक्ताओं ने आदिवासी जीवन-दर्शन, प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता पर चर्चा की। परिचर्चा का संचालन एसी सुनील चंद्र और डीएफओ संदीप शिंदे ने किया।
पारंपरिक परिधानों में दिखा फैशन का रंग
सांस्कृतिक संध्या में आयोजित ‘आदिवासी फैशन शो’ में युवाओं ने पारंपरिक परिधानों के साथ मंच पर अपनी संस्कृति और विरासत की झलक प्रस्तुत की। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में प्रतिभागियों की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और वातावरण तालियों से गूंज उठा।
बच्चों ने कला और नाटक से दिया संदेश
डीएवी इस्पात पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘नमामि गंगे’ विषय पर नाटक का मंचन कर जल संरक्षण का संदेश दिया। वहीं बाल कलाकारों ने सोहराय एवं जादू पाटिया चित्रकला को कैनवास पर उकेरकर अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
आयोजन के दौरान निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को अतिथियों ने सम्मानित किया। इससे विद्यार्थियों और युवा प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ा।
कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र
महोत्सव परिसर में लगाए गए कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। अतिथियों ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और प्रतिभागियों से बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन किया।
डीसी दंपती डॉ. प्रतिमा झा, एसपी नाथू सिंह मीणा सहित प्रशासनिक अधिकारियों की दिनभर मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रमुखता मिली।
प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण तथा आदिवासी परंपराओं के सम्मान के संकल्प के साथ बोकारो आदिवासी महोत्सव-2026 का यह आयोजन संपन्न हुआ।

