एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर

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एस.एन. चतुर्वेदी की रिपोर्ट

जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में पीड़ितों को समय पर सहायता, न्यायिक पैरवी और पुनर्वास व्यवस्था की समीक्षा

पटना, 11 अगस्त : अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पटना समाहरणालय में जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा, अत्याचार से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई, पीड़ितों एवं उनके आश्रितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने तथा लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में विधानसभा सदस्य श्याम रजक, विधानसभा सदस्य अरुण मांझी, उप विकास आयुक्त शुभम कुमार, समाज सेविका सुधा वर्गीस सहित समिति के अन्य सदस्य और संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

जिला कल्याण पदाधिकारी संजीव कुमार रतन ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए अधिनियम के तहत किए जा रहे कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अत्याचार से संबंधित हत्या के मामलों में मृतकों के आश्रितों को प्राथमिकता के आधार पर पेंशन की स्वीकृति एवं भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। जून तक 139 पेंशनरों को पेंशन का भुगतान किया जा चुका है।

1,357 मामले लंबित, प्रभावी पैरवी के निर्देश

बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा की गई। विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया गया कि लंबित मामलों का नियमित अनुश्रवण करते हुए न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करें, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिल सके और पीड़ितों को समय पर न्याय प्राप्त हो।

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि वर्तमान में अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत 1,357 मामले लंबित हैं। समिति ने इन मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए निरंतर और प्रभावी अनुश्रवण पर विशेष जोर दिया।

बैठक में पीड़ित परिवारों को नियमानुसार देय सहायता समय पर उपलब्ध कराने तथा मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।

कबीर अंत्येष्टि योजना की समीक्षा

बैठक में कबीर अंत्येष्टि योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि अब तक 1,935 लाभुकों को योजना का लाभ दिया जा चुका है।

विधानसभा सदस्य अरुण मांझी ने सुझाव दिया कि गरीब परिवारों को अंतिम संस्कार के समय मिलने वाली सहायता राशि में वृद्धि के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के दौरान विस्थापित होने वाले गरीब परिवारों के पुनर्वास और उन्हें व्यवस्थित रूप से बसाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया।

30,757 UDID कार्ड जारी, 12,618 आवेदन लंबित

बैठक में दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनाने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए जिला स्तर पर नियमित रूप से कैंप आयोजित कर चिकित्सकों द्वारा जांच की जा रही है।

अब तक जिले में 30,757 UDID कार्ड जेनरेट किए जा चुके हैं, जबकि 12,618 आवेदन लंबित हैं। लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

विस्थापित महादलित परिवारों के आवासन पर जोर

समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान यदि किसी महादलित परिवार के विस्थापित होने की स्थिति बनती है, तो ऐसे परिवारों के लिए आसपास के क्षेत्र में समुचित आवासन की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए।

समिति के सदस्यों ने कहा कि गरीब एवं वंचित परिवारों के पुनर्वास में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।

आधार कार्ड के बिना भी विद्यालय में होगा नामांकन

बैठक में बच्चों के विद्यालय में नामांकन के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता से जुड़ा मुद्दा भी उठाया गया। इस पर उप विकास आयुक्त शुभम कुमार ने स्पष्ट किया कि विद्यालय में नामांकन के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। जिन बच्चों के पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, उनका भी विद्यालय में नामांकन किया जाएगा।

इस संबंध में संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक जागरूकता और अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

पात्र आश्रितों को नौकरी की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश

बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिन मामलों में पात्र आश्रितों को नौकरी दी जानी है, उनमें आवश्यक दस्तावेज एवं अन्य प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा कराने का निर्देश दिया गया। योग्य आश्रितों को नियमानुसार रोजगार उपलब्ध कराने की अग्रतर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

घटना की सूचना मिलते ही हो त्वरित कार्रवाई

समिति के सदस्यों ने कहा कि ऐसी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसी व्यक्ति के साथ अत्याचार या कोई अप्रिय घटना होने पर पुलिस तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करे। पीड़ितों को समय पर कानूनी एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

जिला प्रशासन की ओर से कहा गया कि किसी भी ऐसी घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित व्यक्ति अथवा उनके परिजन जिला कल्याण पदाधिकारी एवं वरीय अधिकारियों को तत्काल सूचना दें, ताकि नियमानुसार आवश्यक सहायता और कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जा सके।

बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के हितों एवं अधिकारों की सुरक्षा के लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें तथा पात्र लाभुकों को सरकार द्वारा निर्धारित सभी सुविधाओं एवं सहायता का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए।