अंगदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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– रंजीत कुमार सिन्हा की रिपोर्ट

मिलिट्री हॉस्पिटल दानापुर में अंगदान, देहदान और नेत्रदान का संदेश, सैन्य अधिकारियों व जवानों ने लिया संकल्प

पटना, 13 अगस्त 2026। विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर मिलिट्री हॉस्पिटल दानापुर, मुख्यालय बिहार एवं झारखंड सब एरिया तथा मां भगवती एवं तिरुपति बालाजी कल्याण केंद्र, पटना के संयुक्त तत्वावधान में अंगदान, देहदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग अधिकारियों और जवानों ने हिस्सा लिया तथा अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में मिलिट्री हॉस्पिटल दानापुर के कमांडेंट कर्नल तमाल बसु, रजिस्ट्रार कर्नल शशि शेखर, कर्नल तन्मय, मां भगवती एवं तिरुपति बालाजी कल्याण केंद्र के महासचिव संजय कुमार, पूर्व सैन्य चिकित्सा अधिकारी, पैरामेडिकल स्टाफ, मेजर, कैप्टन, नर्सिंग अधिकारी और बड़ी संख्या में सेना के जवान मौजूद रहे। मुख्य वक्ताओं में कल्याण केंद्र के अध्यक्ष सुनील कुमार पुर्बे तथा पीएमसीएच के प्रोफेसर एवं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. गोपाल प्रसाद शामिल रहे।

अंगदान से कई लोगों को मिल सकता है नया जीवन

कार्यक्रम के प्रथम वक्ता सुनील कुमार पुर्बे ने देहदान, अंगदान और नेत्रदान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन अंगदान के माध्यम से मृत व्यक्ति के अंग किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन को बचाने में उपयोगी हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों को जीवनदान दे सकता है। लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि देहदान और अंगदान के माध्यम से व्यक्ति मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में जीवित रह सकता है।

उन्होंने देश में अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता और उपलब्धता के बीच बड़े अंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में मरीज विभिन्न अंगों की प्रतीक्षा करते हैं, जबकि उपलब्ध अंगों की संख्या आवश्यकता की तुलना में काफी कम है।

कॉर्निया की कमी दूर करने पर जोर

सुनील कुमार पुर्बे ने नेत्रदान और कॉर्निया प्रत्यारोपण के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग कॉर्निया संबंधी अंधत्व से प्रभावित हैं और हर वर्ष लाखों कॉर्निया की आवश्यकता होती है। बिहार में भी कॉर्निया की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर है।

उन्होंने कहा कि यदि मृतकों के परिवारों में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़े और अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें तो कॉर्निया की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।

उन्होंने बिहार में अंगदान और देहदान के क्षेत्र में हुए प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 1,880 कॉर्निया प्राप्त हुए हैं, जबकि 27 देहदान और 3 अंगदान सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।

अंधविश्वास छोड़कर विज्ञान और मानवता को अपनाने की अपील

सुनील कुमार पुर्बे ने अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों और अंधविश्वासों को दूर करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह धारणा कि अंगदान या नेत्रदान करने से अगले जन्म में उसी अंग से संबंधित परेशानी होगी, पूरी तरह वैज्ञानिक आधार से रहित है।

उन्होंने कहा कि अंगदान को अंधविश्वास की दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवता और विज्ञान की दृष्टि से देखना चाहिए। उनके अनुसार, नेत्रदान के बाद किसी दूसरे व्यक्ति को दुनिया देखने का अवसर मिल सकता है, जबकि हृदय, लीवर और किडनी जैसे अंग दूसरे मरीजों के लिए जीवन की उम्मीद बन सकते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं आपके जीवन की नहीं, जीवन देने की बात करने आया हूं। मैं आज मृत्यु की नहीं, मृत्यु के बाद भी अमर होने की बात करने आया हूं।”

उन्होंने देहदान को चिकित्सा शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, देहदान से चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों और चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना एवं चिकित्सा का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है।

अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था की जानकारी दी

पीएमसीएच के प्रोफेसर एवं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. गोपाल प्रसाद ने अंगदान के तकनीकी और चिकित्सकीय पक्ष की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO), क्षेत्रीय स्तर पर क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (ROTTO) तथा राज्य स्तर पर राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) की व्यवस्था है।

उन्होंने कहा कि अंगदान करने वालों और अंग की आवश्यकता वाले मरीजों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाकर इस अंतर को कम किया जा सकता है और बड़ी संख्या में मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।

वक्ताओं को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान मिलिट्री हॉस्पिटल दानापुर के कमांडेंट कर्नल तमाल बसु ने सेना की ओर से मां भगवती एवं तिरुपति बालाजी कल्याण केंद्र के अध्यक्ष सुनील कुमार पुर्बे को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। प्रोफेसर एवं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. गोपाल प्रसाद को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मौजूद सेना के अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग अधिकारियों और जवानों ने अंगदान, देहदान एवं नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का संदेश रहा कि मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन अंगदान किसी दूसरे व्यक्ति के लिए जीवन की नई शुरुआत बन सकता है।