– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
मासिक कवि-गोष्ठी में वरिष्ठ और युवा कवियों ने सामाजिक सरोकारों व मानवीय संवेदनाओं पर रचनाएं प्रस्तुत कीं
बोकारो, 25 अगस्त । बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) और अखिल भारतीय चेतना दर्पण के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर-5 स्थित बोकारो इस्पात पुस्तकालय में मासिक कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्यिक आयोजन में नगर के वरिष्ठ और युवा कवियों व साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया और साहित्यिक माहौल को जीवंत बना दिया।
कवि-गोष्ठी में सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और समसामयिक विषयों पर आधारित कविताएं प्रस्तुत की गईं। कवियों ने अपनी विविध भावनाओं और अलग-अलग काव्य शैलियों के माध्यम से श्रोताओं को प्रभावित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और सरस्वती वंदना ‘हे मां शारदे वीणावादिनी’ के साथ हुआ। इसके बाद आयोजित काव्य पाठ में विभिन्न साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
गोष्ठी में कस्तूरी सिन्हा ने ‘क्या कहूँ क्या से क्या हो गए’, अनिल कुमार श्रीवास्तव ने ‘पश्चाताप’, क्रांति श्रीवास्तव ने भोजपुरी कविता ‘केतना कुछ छूट गईल नईहरा के दुआरे’, काजल भलोटिया ने ‘क्या होती है’, कनक लता राय ने ‘दैहिक दैविक भौतिक तापा’, नीलम झा ने ‘धरती की पुकार’, पद्मावति कोमल ने ‘जंतर-मंतर पर युवाओं की आवाज’, ऋचा प्रियदर्शिनी ने ‘इस्पात संयंत्र के कर्मी’, डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने ‘सफलता के सोपान’, शैलजा झा ने ‘रंग’, पंकज प्रेमी ने ‘मेरा भारत देश महान’, विजय शंकर मलिक ने ‘गाओ स्वदेश जयगाथा’ तथा अमृता शर्मा ने ‘पौ बारह शकुनियों के जैसे’ जैसी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा बीएसएल
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने मासिक कवि-गोष्ठी को साहित्यिक गतिविधियों और वैचारिक आदान-प्रदान के लिए उपयोगी मंच बताया। उन्होंने कहा कि कवियों और साहित्यकारों को नियमित रूप से मंच मिलने से नगर में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ती है तथा समाज में रचनात्मक और सकारात्मक चेतना को मजबूती मिलती है।
काव्य पाठ के बाद प्रस्तुत रचनाओं के भाव, शिल्प और विषयवस्तु पर सारगर्भित समीक्षा भी की गई। आयोजन को कला, साहित्य और सामुदायिक चेतना को प्रोत्साहित करने की दिशा में बोकारो इस्पात संयंत्र की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया गया। स्थानीय साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने से इस्पात नगरी में सांस्कृतिक सहभागिता को भी गति मिल रही है।

