– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
विश्व हिंदी परिषद के क्षेत्रीय सम्मेलन में हिंदी, भारतीय भाषाओं और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान पर हुई चर्चा
पटना | 29 अगस्त 2026: बिहार लोक भवन में विश्व हिंदी परिषद की ओर से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के अवसर पर क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन एवं समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर राज्यपाल सहित उपस्थित गणमान्य लोगों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में राज्यपाल को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिंदी राष्ट्र की एकता का सेतु है। हिंदी केवल देश की सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने भारतीय भाषाओं और देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को किया याद
राज्यपाल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के संदर्भ में उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय एकता के विचारों को याद किया। उन्होंने बिहार में विश्व हिंदी परिषद की ओर से हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और राजभवन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि हिंदी हमारी पहचान और विरासत दोनों है। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती सदियों से ज्ञान, साहित्य और संस्कृति की प्रमुख भूमि रही है। भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में मुखर्जी की भूमिका पर चर्चा
विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने सम्मेलन के मुख्य विषय ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी : व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में डॉ. मुखर्जी की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके विचारों की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर चर्चा की।
वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने वैश्विक मंच पर हिंदी की बढ़ती भूमिका पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में देश के बुद्धिजीवियों और प्रवासी भारतीयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। हिंदी के प्रचार-प्रसार को वैश्विक स्तर पर और गति देने की आवश्यकता है।
अन्य गणमान्य व्यक्तियों में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक बिनय कुमार, डॉ. सी. पी. ठाकुर एवं उनके पुत्र दीपक ठाकुर, संजय पासवान एवं वरिष्ठ पत्रकार एस.एन. चतुर्वेदी के अलावा परिषद के अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पदाधिकारी, वरिष्ठ साहित्यकार और प्रबुद्ध जन भी मंच और अग्रिम दीर्घा में उपस्थित रहे। उपस्थित थे।
सम्मेलन में हिंदी के विकास, भारतीय भाषाओं के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

