– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
अनुशासनिक कार्रवाई में प्रक्रियागत गलतियों पर लगेगी रोक, नैसर्गिक न्याय सुनिश्चित करने की पहल
पटना, 04 सितंबर 2026: सरकारी सेवकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई में नियमों की जटिलता और प्रक्रियागत त्रुटियों को समाप्त करने के लिए बिहार सरकार ने “सेवा यात्रा संगिनी” पुस्तक प्रकाशित की है। मुख्य सचिवालय के सभागार में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस पुस्तक का विमोचन किया। इसमें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (सीसीए) सहित सेवा संबंधी सभी जटिल प्रावधानों को सरल भाषा में संकलित किया गया है, ताकि किसी भी कार्रवाई में नैसर्गिक न्याय सुनिश्चित किया जा सके। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को इसकी सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ताकि इसे आवश्यकतानुसार अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाया जा सके।
गलतियां रोकना और व्यावहारिक मार्गदर्शन देना मुख्य उद्देश्य
महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अनुशासनिक कार्रवाई के दौरान नियमों की स्पष्ट जानकारी और प्रशिक्षण के अभाव में अक्सर प्रक्रियागत गलतियां सामने आती हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय ने यह आठवीं पुस्तक तैयार की है। इससे पहले विभाग द्वारा संबंधित विषयों पर सात पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं। यह पुस्तक जांच और अनुशासनिक कार्रवाई संचालित करने वाले अधिकारियों के लिए एक व्यावहारिक “रेफरेंस बुक” के रूप में काम करेगी।

प्रशिक्षण पर जोर, पुलिस विभाग को भी मिलेगा लाभ
निदेशालय द्वारा कृषि, श्रम और पुलिस सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को इस संबंध में लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है और मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों को सतत प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से निदेशालय में सतीश कुमार तिवारी, भगवान दास साहू और शालिग्राम पांडेय की स्थायी नियुक्ति भी की गई है। डीजीपी विनय कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक विभागीय कार्रवाई की शुरुआत से लेकर न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन तक अत्यंत उपयोगी साबित होगी और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई में सीधी सहूलियत मिलेगी।
