बोकारो स्टील प्लांट में भड़की कर्मचारियों की नाराजगी: धमन भट्टी सीजीएम कार्यालय पर गरजे बीएसएल कर्मी

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–संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट

वेज रिवीजन, बोनस फॉर्मूला और 45 लंबित मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज; मांगें न मानने पर निकाला जाएगा काला झंडा मौन जुलूस

बोकारो, 28 सितम्बर 2026 : बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) में कार्यरत अनाधिशासी कर्मचारियों का गुस्सा सेल व संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ बढ़ता जा रहा है। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (बीएकेएस) के बैनर तले जारी दूसरे चरण के आंदोलन के पांचवें दिन कर्मचारियों ने धमन भट्टी (ब्लास्ट फर्नेस) के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) कार्यालय के समक्ष जोरदार और आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सेल कॉर्पोरेट और स्थानीय प्रबंधन की नीतियों के विरोध में जमकर नारेबाजी की।

कर्मचारियों का मुख्य आक्रोश वेज रिवीजन 2017 में कथित अनियमितताओं, प्रबंधन द्वारा एकतरफा तैयार किए गए अवैध फॉर्मूले को रद्द करने, इंसेंटिव फॉर्मूले में संशोधन में जानबूझकर की जा रही देरी तथा एनजेसीएस (NJCS) में गैर-निर्वाचित नेताओं को स्थान देने को लेकर है। संघ के नेताओं ने बताया कि इन गंभीर मुद्दों पर न्यायालय में वाद लंबित होने के बावजूद सेल कॉर्पोरेट स्तर पर कर्मचारियों से जुड़ी 45 से अधिक मांगें लंबे समय से धूल फांक रही हैं, जिसके कारण कर्मचारियों में असंतोष चरम पर है।

सभा का संचालन विभागीय प्रतिनिधि अर्जुन मिंज ने किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वेज रिवीजन 2017 में कर्मचारियों के जायज प्रस्तावों को दरकिनार कर प्रबंधन के एकतरफा फॉर्मूले को अवैध तरीके से लागू किया गया। ठीक इसी प्रकार का रवैया बोनस फॉर्मूले को लेकर भी अपनाया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सब-कमेटी और कोर कमेटी के नाम पर तथाकथित गैर-निर्वाचित नेताओं एवं प्रबंधन की साठगांठ के चलते संयंत्र के मेहनतकश कर्मचारियों को उनके वास्तविक श्रम का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

प्रदर्शन को संघ के महासचिव हरिओम, अध्यक्ष दिलीप कुमार, उपाध्यक्ष कृष्ण रजवार, कोषाध्यक्ष राहुल साव, उपमहासचिव माणिक मुंडा तथा कार्यकारिणी के कई सदस्यों ने संबोधित किया। वहीं धमन भट्टी के विभागीय प्रतिनिधि नीरज कुमार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मांगें पूरी न होने पर फिलहाल सांकेतिक विरोध दर्ज कराया जा रहा है, लेकिन यदि प्रबंधन ने अपने अड़ियल रुख में सुधार नहीं किया तो कर्मचारी काले झंडे लेकर सामूहिक रूप से मौन जुलूस निकालने को बाध्य होंगे।

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