–लाइव ख़बर नेशन || एस०एन०चतुर्वेदी
मगध संगीत संस्थान का भावनृत्य, झिझिया और सामा-चकेवा की मनमोहक प्रस्तुति; शास्त्रीय नृत्य और लोकगीतों से सजी शाम
पटना, 13 अक्टूबर 2026 : ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और लोक कलाओं की अनुपम छटा देखने को मिली। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा पटना प्रमंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में पारंपरिक लोकगीतों, शास्त्रीय नृत्य और लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह का शुभारंभ मगध संगीत संस्थान के कलाकारों द्वारा बिहार गौरव गाथा पर आधारित भावपूर्ण नृत्य से हुआ। कलाकारों ने “महका-महका सोंधी माटी का बिहार है…” गीत के माध्यम से राज्य के गौरवशाली इतिहास, लोक पर्वों और माटी की सुगंध को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके बाद चर्चित लोक गायिका नीतू नवगीत ने अपनी मधुर आवाज से समां बांध दिया। उन्होंने “मांगे ला हम वरदान हे गंगा मइया”, छठ गीतों और लोकप्रिय मैथिली लोकगीत “राम लगिहे पाहुनवां” की सुरीली प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं जानी-मानी गायिका उषा सिंह ने “सत्यम शिवम सुंदरम” और “कोयल बिनु बगिया ना शोभे राजा” जैसे गीतों से सुरों की खूबसूरत छटा बिखेरी।
कार्यक्रम में कला श्री समूह के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत दुर्गा वंदना पर आधारित शास्त्रीय नृत्य ने भक्ति और शास्त्रीय कला का अद्भुत समन्वय पेश किया। इसके अलावा मिथिला की लोक परंपरा को दर्शाते सामा-चकेवा आधारित संगीतमय नृत्य और पारंपरिक झिझिया नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सिने कलाकार चाहत सिंह ने भी भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। दशहरा महोत्सव के इस मंच ने दर्शकों को बिहार की समृद्ध लोक कलाओं और लोक संगीत की जीवंतता से सीधे रूबरू कराया।

