गोट फेडरेशन कार्यालय का उद्घाटन: बिहार में बकरीपालन को सहकारिता से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की पहल

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–लाइव ख़बर नेशन || एस०एन०चतुर्वेदी

पशुपालन निदेशालय में खुला गोट फेडरेशन का नया कार्यालय, गोट बैंक, पशु मार्ट और मीट कियोस्क स्थापित करने की बनी योजना

पटना : बिहार में बकरीपालन को संगठित रूप देकर इसे व्यावसायिक और लाभकारी गतिविधि के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पशुपालन निदेशालय, पटना के प्रथम तल के पूर्वी-दक्षिणी भाग में ‘बिहार राज्य बकरी पालक सहकारी परिसंघ लिमिटेड’ (गोट फेडरेशन) के नए कार्यालय का विधिवत उद्घाटन किया गया है, जिसमें अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक का कार्यालय कक्ष भी स्थापित किया गया है।

इस उद्घाटन समारोह में गोट फेडरेशन के अध्यक्ष सह डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के शीर्षत कपिल अशोक, पशुपालन निदेशक श्रीकांत शास्त्री, गोट फेडरेशन के प्रबंध निदेशक सुभाष नारायण और जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा सहित सहकारिता एवं पशुपालन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पटना, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया क्षेत्र के क्षेत्रीय व संयुक्त निदेशक तथा सहकारिता विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

फेडरेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्ष शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि बकरीपालन बिहार के ग्रामीण परिवारों, विशेषकर छोटे, सीमांत किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आजीविका का एक मजबूत साधन है। सहकारिता आधारित व्यवस्था के माध्यम से बकरीपालकों को संगठित कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके तहत गोट बैंक, पशु मार्ट, मीट के कियोस्क संचालित करने और गोट रियरिंग फार्म स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने फेडरेशन के कार्यों में पूरी पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और पशुपालकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

प्रबंध निदेशक सह संयुक्त सचिव सुभाष नारायण ने अपने संबोधन में फेडरेशन को एक सक्रिय, प्रभावी और जनोपयोगी संस्था के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया, ताकि इसकी योजनाओं का वास्तविक लाभ राज्य के बकरीपालकों तक पहुंच सके। इस सहकारिता आधारित संस्थागत व्यवस्था के बनने से ग्रामीण महिलाओं और बकरीपालन से जुड़े परिवारों को उन्नत प्रबंधन, तकनीकी मार्गदर्शन, बेहतर बाजार संपर्क और विपणन की आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी। इस बात की जानकारी पशुपालन सूचना एवं प्रसार के सहायक निदेशक डॉ. रमेश कुमार ने दी।

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